गीतिका
चलते चलते किस युग तक आये हम है, जिधर देखो नफरत का माहौल गरम है।। हर बात दुसरे को यहां
Read Moreज़िन्दगी गुजर ही जाती है पर अभी रश्मि को समझ नहीं आ रहा था कि जीवन का ये अंधेरा कैसे
Read Moreवो लेखिका नहीं थी… वो कवियत्री भी नहीं थी न जाने कब अपने भावो को सरल सहज आकार देने लगी
Read Moreशाम गहरा रही थी। दोनों का एक दुसरे से विदा लेने का वक्त आ चुका था। राजीव अमेरिका जाने
Read Moreकैसे कहूं मुंह से कहा ना जाये कि तुम बिन सावन आग लगाये । भीगा मौसम, भिगाये मन मेरा ठंडी
Read Moreबचपन से ही उसे डांस का बहुत शौक था । अक्सर छुप छुप कर टीवी के सामने माधुरी के गाने
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