ग़ज़ल
देखकर मंदिर शिवाला सिर झुकाती हूँ मगरआज ये हालात है कुछ मांग मैं, पाती नहींजिस जगह इज्ज़त मिली सजदे किये
Read Moreकहमुकरी जीवन में वह रस को घोलेमिश्री जैसी बातें बोलेरूठे तो वह फेरे अँखियाँक्या सखि साजनना सखि सखियाँ ।। त्रिवेणी1-
Read Moreयादों की गठरी से उसने, पत्र पुराना पाया होगा । तीव्र हुई होगी उर सरगम ,याद बहुत कुछ आया होगा
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