ग़ज़ल
जाल – जंजाल हैहाल भी बेहाल है मुद्दतों से कट रही हैऐसे ही, कमाल है । अश्क है , न
Read Moreकहमुकरी जीवन में वह रस को घोलेमिश्री जैसी बातें बोलेरूठे तो वह फेरे अँखियाँक्या सखि साजनना सखि सखियाँ ।। त्रिवेणी1-
Read Moreयादों की गठरी से उसने, पत्र पुराना पाया होगा । तीव्र हुई होगी उर सरगम ,याद बहुत कुछ आया होगा
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