कुंडलियां – माया
माया ठगनी रूप को , मनुज जरा पहचान । हर लेती मति ये सदा, बात हमारी मान ।। बात हमारी
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Read Moreमन को हरते है सदा, मीठे मीठे बोल। बोल अनोखी चाशनी, रिश्तों में दे घोल ।। घोल प्रेम संसार में
Read Moreहोते है बस नाम के, रह जाते बेनाम । रिश्ते इंटरनेट के , आते कब हैं काम ।। जबरन पकडे
Read Moreवह दौर जहाँ खतो से खैरियत पुछी जाती थी , खुशखबरी ली जाती थी । मजमून देख सब दिलों के
Read Moreजीवन का रंगरास तुम्हीं से , तुम पर तन मन हारा है । सरल, सजल हृदय पर तेरे न्यौछावर जग
Read More1- तोड़ नेह के बाँध तुम, चले गये चितचोर । धधक रही अति वेदना,मचा हृदय में शोर ।। दावे सारे
Read Moreमैं धरा अधीर हूँ पीड़ित मन की पीर हूँ। सोखती हूँ हर व्यथा और जमा गई जो नीर हूँ ।
Read Moreज़िन्दगी गुजर ही जाती है पर अभी रश्मि को समझ नहीं आ रहा था कि जीवन का ये अंधेरा कैसे
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