बदलाव
कहना कितना आसान हैबदलाव लाना।कभी किसी पेड़ की जड़ कोबदलकर देखना।।क्या पेड़ खड़ा रह पायेगाये करके देखना।एक वट वृक्ष पीपल
Read Moreप्रकृति तत्व है हिन्दी इसे तुम जानों वेद सारांश है हिन्दी इसे तुम मानों।।१।। जमीं से आसमां तक सार है
Read Moreअनकहे लम्हों को जो समझ न पाए, उसे कैसे न कहूं कि ये नहीं समझ पाए। अरमानों की मुठ्ठी बन्द
Read Moreहमारे शब्दों ने अनहदों के दायरे देखे हैं। चट्टानों से उत्तर कर सागर की गहराईयों को देखा है। आलोचकों के
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