ग़ज़ल
हदों से यूँ सितम की पार जाकर याद रखना सुकूं मिलता नही है दिल दुखाकर याद रखना खड़ा है झूठ
Read Moreजिन लोगों के सच्चे किरदार नही होते वे लोग यक़ीं मानो भव पार नही होते जो छोड़ हक़ीक़त को सपनों
Read Moreसाहिबे दस्तार होने चल दिए फूल भी अब ख़ार होने चल दिए यूँ बने रिश्ते तिजारत, आपसी मस’अले अख़बार होने
Read Moreसामने वो अगर नही आता चैन फिर रात भर नही आता कुछ किये बिन बुलंदियाँ पा लूँ मुझको ऐसा हुनर
Read Moreसाथ जिसके धार्मिक उन्माद आए ऐ ख़ुदा ऐसा नही जेहाद आए भूल कल कोई हुई होगी यक़ींनन आज फिर से
Read Moreतन-मन जीवन तक अर्पन कर न्यौछावर जो हुए वतन पर। उनको शीश झुका कर सौ- सौ बार नमन… जब दुश्मन
Read Moreधूप को चाँदनी नहीं लिखते आँसुओं को खुशी नहीं लिखते जो कलमकार हैं किसी हालत रात को दिन कभी नही
Read Moreबहुत बेचैन हैं कलियाँ गुलों का रंग फ़ीका है ये मंज़र साफ़ कहता है यकींनन ड़र किसी का है गुलों
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