अभी भी समय है…
ये धुएँ की चादरें किसने ओढ़ लीं शहर ने?कहीं पेड़ थे, अब वहाँ सिर्फ़ इमारतें हैं। धरती पसीने से तर
Read Moreये धुएँ की चादरें किसने ओढ़ लीं शहर ने?कहीं पेड़ थे, अब वहाँ सिर्फ़ इमारतें हैं। धरती पसीने से तर
Read Moreहरियाणा की ग्रामीण संस्कृति में ‘चौपाल’ सिर्फ एक बैठने की जगह नहीं, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और कभी-कभी राजनीतिक निर्णयों का
Read Moreजब न्याय की नींव डगमगाए,जब सत्ता सच पर वार करे,तब कोई तलवार नहीं उठती —कलम उठती है, अंगार करे। ना
Read Moreपग-पग पर जंजीरें थीं, पर आँखों में अंगारे थे,अकेला था रणभूमि में, पर लाखों पर वो भारी थे।स्वाभिमान की चट्टानों
Read Moreएक घर था कभी, जहाँ हँसी भी गूंजती थी,आज वहीं शून्य की चीत्कार सुनाई देती है।सात देहें, सात कहानियाँ, सात
Read MoreJio ने हमें सस्ते डेटा का स्वाद चखाया और फिर उसकी लत लगाकर हमारी जेबें ढीली कर दीं। आज WhatsApp
Read Moreलहू बहाया मैदानों में,जीत के ताज सिर पर सजाए,हर युद्ध से निकला विजेता,पर अपनों में खुद को हारता पाए। कंधों
Read Moreचेहरों पर मुस्कानें हैं,पर दिलों में दूरी है।रिश्ते हैं बस नामों के,हर सूरत जरूरी है। हर एक ‘कैसे हो’ के
Read Moreऐ ज़िंदगी, तू हर रोज़ इक नया चेहरा दिखा देती है,अपनों की भीड़ में अजनबियों-सी हवा बहा देती है।हर रिश्ते
Read Moreत्रेता में धनुष उठा था जब,जनकपुरी थर्राई थी।धरा काँपी, गगन डोला,वीरता मुस्काई थी।राम ने तोड़ा जिसको छूकर,वह धनुष, वह गर्व
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