बोधि की चुप्पी
शांत है लुंबिनी की पगडंडी,जहाँ फूलों ने पहले देखा प्रकाश,राजकुमार की पहली हँसी में,छुपा था अनंत का एक उलझा प्रकाश।
Read Moreशांत है लुंबिनी की पगडंडी,जहाँ फूलों ने पहले देखा प्रकाश,राजकुमार की पहली हँसी में,छुपा था अनंत का एक उलझा प्रकाश।
Read Moreयही गलती पृथ्वीराज चौहान ने की थी, मोदी जी खून में उबाल हो, जुबां में ज्वाल हो,फिर क्यों हर बार
Read Moreरक्त से लथपथ इतिहास,धधकते ग़ुस्से की ज्वाला,सरहदों पर टकराती हैं चीखें,जिन्हें सुनता कौन भला? वो शहादतें, वो बारूदी हवाएँ,टूटते काफिले,
Read Moreधरती पर जिनके पग पड़े, आकाश में जो उड़ते हैं,वीर सपूत वे हमारे, जीवन से बढ़कर करते हैं।हर दर्द को
Read Moreसिर्फ सिंदूर से क्या होगा,आग अभी सीने में बाकी है।खून में जो लावा बहता है,उसमें हल्दी की तासीर बाकी है।
Read Moreहमारे सैनिक, जो सीमाओं पर अपने प्राणों की बाजी लगाते हैं, हमारे असली नायक हैं। युद्ध की आशंका में लौटते
Read Moreयुद्ध की आहट से लौटते कदम,वो वीर, जो सीमाओं का श्रृंगार हैं,छुट्टियों से अपने कर्तव्य की ओर,बिना आरक्षण, बिना थके,
Read Moreभोला किसान, हल चलाता,मिट्टी से सोना उपजाता।फिर एक दिन आया बैंकर,सूट-बूट में, मुस्काता। बोला – “हम देंगे केसीसी कार्ड,ताकि सपनों
Read Moreनिजी बैंक किसानों को केसीसी योजना के तहत ऋण देते समय बीमा और पॉलिसियों के नाम पर चुपचाप उनके खातों
Read Moreआज की पत्रकारिता एक गहरे संकट से गुजर रही है, जहाँ कलमकार हाशिए पर हैं और PR मैनेजमेंट का बोलबाला
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