हत्या के एक दोष पर दो उम्रकैद: न्याय की सीमा या उसका उल्लंघन?
भारतीय न्याय व्यवस्था के दरवाज़े पर एक संवेदनशील और जटिल प्रश्न खड़ा है—क्या किसी व्यक्ति को एक ही अपराध के
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Read Moreआयुष्मान भारत योजना का उद्देश्य गरीबों को मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण इलाज देना है, परंतु निजी अस्पतालों द्वारा इसे लूट का
Read Moreरिश्ते अब महज़ ज़रूरतों के एटीएम बनते जा रहे हैं। डिजिटल दुनिया ने संवाद को ‘रीचार्ज पैकेज’ और मुलाक़ातों को
Read More“काग़ज़ की नाव” एक सजीव और संवेदनशील बाल काव्य संग्रह है जो बच्चों की सरल और मासूम दुनिया को खूबसूरती
Read Moreइंदौर के राजा और मेघालय की सोनम के हनीमून पर हुई हत्या की घटना न केवल व्यक्तिगत त्रासदी है, बल्कि
Read Moreमैं वह बड़ा बेटा हूँ,जिसने हँसकर जीवन की आग पिया है।जिसने चुपचाप लुटा अपना यौवन,और घर का भाग्य सिया है।
Read Moreहर घर की दीवारें अपने भीतर बहुत कुछ समेटे होती हैं—खुशियाँ, तकरार, उम्मीदें और त्याग। लेकिन उन सबके बीच कहीं
Read Moreसाहित्य न बिकता है, न झुकता है,वह तो भीतर की लौ में सुलगता है।ना नाम के पीछे, ना दाम के
Read Moreसाहित्य आज साधना नहीं, सौदेबाज़ी का बाज़ार बनता जा रहा है। नकली संस्थाएं ₹1000-₹2500 लेकर ‘राष्ट्रीय’ और ‘अंतरराष्ट्रीय’ पुरस्कार बांट
Read Moreबेचारा पौधा एक,फोटो में पच्चीस लोग। किसी ने पकड़ा गमला,तो किसी ने थामी टहनी,किसी ने मुस्कान ओढ़ी,तो किसी ने झलकाई
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