Author: *डॉ. सत्यवान सौरभ

राजनीति

हत्या के एक दोष पर दो उम्रकैद: न्याय की सीमा या उसका उल्लंघन?

भारतीय न्याय व्यवस्था के दरवाज़े पर एक संवेदनशील और जटिल प्रश्न खड़ा है—क्या किसी व्यक्ति को एक ही अपराध के

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राजनीति

आयुष्मान भारत या असहाय भारत : निजी अस्पतालों में योजना की लूट और लाचारी

आयुष्मान भारत योजना का उद्देश्य गरीबों को मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण इलाज देना है, परंतु निजी अस्पतालों द्वारा इसे लूट का

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सामाजिक

रिश्तों का एटीएम: जब प्यार केवल ट्रांज़ैक्शन बन जाए

रिश्ते अब महज़ ज़रूरतों के एटीएम बनते जा रहे हैं। डिजिटल दुनिया ने संवाद को ‘रीचार्ज पैकेज’ और मुलाक़ातों को

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पुस्तक समीक्षा

“काग़ज़ की नाव” : मासूमियत, कल्पना और संवेदना का सागर

“काग़ज़ की नाव” एक सजीव और संवेदनशील बाल काव्य संग्रह है जो बच्चों की सरल और मासूम दुनिया को खूबसूरती

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भाषा-साहित्य

पुरस्कारों का सौदा: साहित्य के बाज़ार में बिकती संवेदनाएं

साहित्य आज साधना नहीं, सौदेबाज़ी का बाज़ार बनता जा रहा है। नकली संस्थाएं ₹1000-₹2500 लेकर ‘राष्ट्रीय’ और ‘अंतरराष्ट्रीय’ पुरस्कार बांट

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