Author: *डॉ. सत्यवान सौरभ

पर्यावरण

जल की बूंद-बूंद पर संकट: नीतियों के बावजूद क्यों प्यासी है भारत की धरती?  

  भारत दुनिया की 18% आबादी और मात्र 4% ताजे जल संसाधनों के साथ गंभीर जल संकट का सामना कर

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राजनीति

संविधान हत्यारे कौन? – जब अवसरवाद शर्म को भी खा जाता है

आपातकाल: लोकतंत्र पर लगा पहला आधिकारिक तालाजनता ने विरोध किया, फिर क्षमा भी दीबदले हुए चेहरे, वही मौकापरस्तीआज की सत्ता

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राजनीति

पेंशन का अधूरा वादा: भारत के बुज़ुर्गों के लिए सामाजिक सुरक्षा की लड़ाई

भारत आज जनसंख्यिकीय संक्रमण के उस मोड़ पर खड़ा है, जहाँ युवाओं की अधिकता के पीछे छिपी एक चुप्पी है

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राजनीति

तृतीय परमाणु युग’: बदलती दुनिया और डगमगाते वैश्विक मानदंड

रूस-यूक्रेन युद्ध, चीन की आक्रामकता और उत्तर कोरिया के मिसाइल परीक्षणों के बीच दुनिया एक नए परमाणु युग में प्रवेश

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शिक्षा एवं व्यवसाय

कोचिंग का क्रेडिट, स्कूल की गुमनामी: शिक्षकों के साथ यह अन्याय कब तक?

आज कोचिंग संस्थानों को छात्रों की सफलता का सारा श्रेय मिलता है, जबकि वे शिक्षक गुमनाम रह जाते हैं जिन्होंने

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सामाजिक

संकीर्ण जीवन-दृष्टि और टूटती नैतिक रीढ़

आधुनिक समाज में “अच्छे जीवन” की जो धारणा प्रचलित है, वह दिन-ब-दिन और भी अधिक संकीर्ण, आत्मकेन्द्रित और भौतिकतावादी होती

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