बारिश
इस बारिश भीग लूँ ज़रा ,मन मस्तिष्क को सींच लूँ ज़रा , जो दफन हो चुकी अभिलाषाएं फिर से वो
Read Moreतुम जो कुछ हो आज किसी का योगदान होगा जमीर रख दी गिरवी पर उसका निशान होगा| मेहनत तो बेशक
Read Moreकैसे कह दें कि हम करते हैं सृजन भावनाओं का सिर्फ तो वह होता चित्रण बोटियाँ जो कट रही है
Read Moreमैं और मेरे स्वयं के संग चलती अक्सर तनातनी| वह क्यों कहती है हमसे ना करना अब मनमानी|| लिखने को
Read Moreसैनिक सरहद पर खड़े, देश के वह जवान| हम बैठे अपने घरों, उन पर है अभिमान|| किसका होगा लाल वो,
Read Moreकरती हूं जिससे मैं अपने मन की बातें, है वो एक रफ कॉपी और ढेर सारी किताबें| रफ
Read Moreहर बार दुपट्टे में वो बांध देते हैं गाँठें बाँधे है भविष्य जो हमे संग है बाँटने| क्या कहे, किसी
Read Moreएक ढलती शाम,आईना को किया साफ उसने कहा देर से ही सही, आ गई पास| आई हो अब, जब घिर
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