हनुमान जी
संकट हरते मंगल करतेदुखियों के दुख हरते,पवनपुत्र हनुमान जी।रामभक्त, भक्ति शिरोमणितनिक नहीं अभिमान जीविघ्न विनाशक हनुमान जी।राम राम रटते हैं
Read Moreअब तो दिवास्वप्न सी लगती हैवो चूल्हे की रोटी,जिसे बड़े प्यार से माँ अपने हाथों से बढ़ाकरगोल गोल बनाकर चूल्हे
Read Moreपत्नी जी यदा कदा ही कहती हैंकुछ समझ नहीं आता कि आज क्या बनाऊँबदले में जब मैं कहता हूँकि कुछ
Read Moreभरी सभा में साड़ी खींचता दुशासनबेबस असहाय द्रौपदीआर्तनाद कर भरी सभा से गुहार करती,पर मौन थे उसके पांचों पतिलज्जा से
Read Moreस्वभाव और संस्कारों के विविध पहलुओं की चर्चा छिड़ जाय तो हर कोई अपना ज्ञान बघारने लगता है लेकिन
Read Moreयह प्रश्न भी बड़ा अजीब हैआज भी जब यह पूछना पड़ता है कि तू कौन है?या मन के किसी कोने
Read Moreहमारे जीवन में सौभाग्य/दुर्भाग्य का समावेशी स्वरूप गतिशील प्रगतिशील होकर साथ साथ चलता रहता है। धर्म ग्रंथों और ज्ञानियों के
Read Moreकहते हैं वक्त अच्छे अच्छों को मौन कर देता है। कुछ ऐसा ही वरिष्ठ क्रिमिनल लायर आशुतोष जी के साथ
Read Moreभूल से नहीं अपनी मूर्खता सेहम खुद को नहीं बचा पाए,क्योंकि हम आज कीआम राजनीति जो नहीं समझ पाए।घर परिवार
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