युद्ध की विभीषिका
युद्ध की विभीषिका अबपड़ रही भारीतुम्हारे लिए। क्या फायदा मिलेगा बताओबम-बारुद फोड़करतुम्हारे लिए। जरुरी अब विचार करनायुद्ध का अत्याचारतुम्हारे लिए।
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Read Moreजैसे भी हो नाम चाहिए।बस हमको आराम चाहिए।। बदनामी की नहीं है चिंता,हमको केवल दाम चाहिए। खेल स्वार्थ का खेल
Read Moreगोण्डा (उत्तर प्रदेश) के वरिष्ठ कवि साहित्यकार देहदानी यमराज मित्र सुधीर श्रीवास्तव को जनार्दन पाण्डेय ‘अनुरागी’ साहित्य सम्मान-2025 से सम्मानित
Read Moreकाम तो राम ही आयेंगेयह तो हम सबको पता है,पर ज्यादा भरोसा नहीं है।क्योंकि हम खुद को राम समझते हैं,राम
Read Moreआज की जरुरत हैसमझो जिम्मेदारी अबतुम्हारे लिए। कौन चाहता है समझनाक्या कैसा कर्तव्यतुम्हारे लिए। बूंद-बूंद से भरतासबका ही घड़ातुम्हारे लिए।
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