मूरख
हे मुरख तुम्हें मेरा प्रणाम तुमसे है यह जग बदनाम उल्टा सीधा तेरा हर काम गाँव जवार तुमसे परेशान विद्यालय
Read Moreसागर की लहरों पे खेलना आसमान से आगे है बढ़ना गर पाना है नई कोई मुकाम संघर्ष को करना है
Read Moreमौसम ने ले ली है अंगड़ाई पलाश की गुँचे डाली पे आई गरमी ने हल्का दस्तक लगाई जाड़े की कर
Read Moreगगन का पट खुल गया सारा लुप्त हुआ आसमान से तारा सूरज की किरण ले है आई जगमग रोशनी जग
Read Moreजिन्दा है जब आशा की काया निराशा की सूरत पे मातम छाया चेहरे की रौनक लौट कर है आई जीने
Read Moreभोर का सूरज लेकर आता है नई उमंग व नई ताजगी तन मन को नई ऊर्जा देता कर
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