कविता

नववर्ष मंगलमय हो

समस्त जय विजय पत्रिका के सदस्यों को नववर्ष मंगलमय हो नूतन आस हो,दृढ विश्वास हो,खुशियों से हो सामना। नववर्ष मंगलमय हो आपका बस यही है कामना। नवप्रभात,नवचेतना से नवजीवन मधुर गुंजार दे। पुष्प पग-पग में बिछे ये संसार सारा प्यार दे। सुख ,समृधि , तेज़ प्रखर को कर जोड़ कर थामना। नववर्ष मंगलमय हो आपका […]

कविता

गरीबी को डर बस भूख का है

बारिश भिगाती रही मगर गरीबी को डर बस भूख का है गर्मी भी सताती रही मगर गरीबी को डर बस भूख का है सर्दी कंपकंपाती रही मगर गरीबी को डर बस भूख का है मौसम से अमीरी ही डरी, गरीबी को डर बस भूख का है कोई सत्ता में आया,छाया गरीबी को डर बस भूख […]

कविता

ममता भी अख़बार में

सुबह एक हाथ में था समाचार पत्र और एक हाथ में थी चाय की प्याली। पीते-पीते चाय मैंने जब नज़र ख़बरों पर है डाली। मुख्य पृष्ठ पर सबसे बड़ी खबर नेता जी का विदेशी दौरा था। और पत्र के कोने में कहीं एक किसान गरीबी के लिए रो रहा था और जब कोई नहीं आया […]

कहानी

एक भूल

कभी किसी को छोटा समझ कर उसकी अवहेलना करना कितनी बड़ी भूल हो सकती है इसका एहसास मुझे मेरे साथ हुई एक घटना ने दिलाया। एक सुबह मैं अपने ऑफिस के लिये निकला मुझे देर हो गई थी।तेज गति से बढ़ते हुए कदम अचानक एक करुण आवाज़ सुनकर ठिठक गए।मैंने मुड़कर देखा एक गन्दे कपड़े […]

कविता

प्राकृतिक चिकित्सा

पंच तत्व में निहित है सब रोगों का उपचार प्राकृतिक चिकित्सा दे रही जीवन को आधार शुद्ध जल,स्वच्छ वायु,पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण आकाश,अग्नि सब दे रहे बल,बुद्धि,आकर्षण प्रकृति से प्राप्त हुआ हमें ये अनुपम उपहार प्राकृतिक चिकित्सा दे रही जीवन को आधार योग अधिक हो,भोग हो नियमित रोग मुक्त रहें मानसिक और शारीरिक कष्ट से लोग […]

कविता

एक अवगुण जल जाने दो

जुआं,नशा व अन्य व्यसन से जीवन न मिट जाने दो दशहरे के इस महापर्व में एक अवगुण जल जाने दो हर वर्ष रावण जल कर बस एक ही पाठ पढ़ाता है अभिमान की अग्नि में जल,ज्ञान भी राख हो जाता है दुष्कर्मों का तर्पण और हृदय में प्रण कर ही मेले जाना मेले से जब […]

कविता

दशहरा उत्सव

रावण ज्ञानी था अभिमानी बात किसी की ना मानी द्वेष दंभ की अग्नि में जल के राख हुई सब मनमानी हठयोगी मिल गया धूल में धरा घृणा से भरी हुई राघव ने जब बाण चलाया,आत्मा निकली मरी हुई सत्र बीत गए पर वायु में रावण के गुण समाहित हैं हवन करो सब निर्मल हो,छवि राम […]

हास्य व्यंग्य

मैं बना कृष्ण

आप सभी कविगण व लेखकों से क्षमा चाहूँगा अत्यधिक व्यस्तता के कारण आप लोगों के बीच नहीं आ सका.. आज अपनी पहली हास्य कविता जो 3 वर्ष पहले लिखी थी ,के साथ उपस्तिथ हूँ…. इक रोज मैंने सोचा मैं कान्हा बन के जाऊँ दिल का तार छेड़े ऐसी धुन मैं छेड़ जाऊँ दृढ़ निश्चय पे […]

गीतिका/ग़ज़ल

याद रहेंगे..

गजल.. 221 1221 1221 1211 मतला.. दीवार गिरे बैर कि गम शाद रहेंगे इन्सां कु किये खैर करम याद रहेंगे अशआर.. दहलीज कु है दर्द कि दरख्त भि बन्द हैं टूटकर बिखर जाए,करम याद रहेंगे तहजीब कि महफ़िल भि सजी देख नुमाइश महफूज दुआ माँ कि,वहम याद रहेंगे हमदर्द कु सब्जबाग दिखा तोड़ दिया दिल […]

गीतिका/ग़ज़ल

ईद आ गई

गले मिलकर मिटा लो फासले ईद आ गई। मोहब्बत के शुरू हों सिलसिले ईद आ गई। नए ख्याल नई ख्वाहिश हसीं ख्वाब आँखों में खुशियों के सुहाने सफर पे चलें ईद आ गई बढ़ जाये भाईचारा,बढ़े सुख-शांति,बरक्कत दुआ है कोई भी न रहे अकेले ईद आ गई। तल्खी से तबस्सुम को भी रोते हुए देखा […]