विधाता छंद
जवाँ तुम हो जवाँ हम हैं, जवाँ ये वादियाँ सारी। जवाँ है धड़कनें दिल की, जवाँ मैं दिल गयी हारी।
Read Moreजवाँ तुम हो जवाँ हम हैं, जवाँ ये वादियाँ सारी। जवाँ है धड़कनें दिल की, जवाँ मैं दिल गयी हारी।
Read Moreकजरे की धार नही मोतियों के हार नही चेहरा रुप रंग अंग सब बे मिसाल है बिन श्रृंगार रुप देख
Read Moreराजनीति में ‘फर्जी-डिग्री’ होना मंत्रियों को मियादी बुखार होने जैसा है । यह बीमारी फिर से उखड़ गई है ।
Read Moreआल्ह छ्न्द===== १६+१५=३१ चरणांत गाल -२१ ================================ फागुन पिया गये परदेश, —-भेजे कोई ना संदेश / जियरा मोर झूमि के
Read Moreहाकलि मुक्तक छ्न्द [४+४+४+२] फागुन माया छाया है रंगों ने भर माया है घर अरु आँगन गाता क्यों होली कंचन
Read Moreमस्त मगन ये फाग महीना, लाल गुलाब पलाश खिलें हैं अबीर लियो हाथ में भाई, बैर छोड़ सब गले मिले
Read Moreजा मत छोड़ मकान दलान मलाल जिया मत राखहु स्वामी धीरज धारहु आपुहि मानहु जानहु मान न पावत नामी।। खोजत
Read Moreमाटी अपने देश की, पुलकित करती गात। मन में खिलते सहज ही, खुशियों के जलजात।। खुशियों के जलजात, सदा ही
Read Moreतुलसी आँगन में रहें, सदा करे कल्याण दूध पूत स्वस्थ रहें , रोग करे प्रयाण रोग करे प्रयाण, सुन्दर चेहरा
Read More