गाँधीवाद
रामनाम जपते भाईरंच न मन में सच्चाई स्वच्छता के अभियान चलेनहीं सफाई हो पाई अनगिन पेड़ कटें प्रतिदिनहुई न पौध
Read Moreइज़हारे वफ़ा का वो पल सुहाना जो था,याद तो आता होगा।माज़ी का वो लम्हा कभी कभी तुमको भी तो रूलाता
Read Moreहमें इतनी फुर्सत कहां थी कि हम चले ही आते मुश्ताक़।तुमने हमें ना बुलाकर हाले दिल अपना बयां कर ही
Read Moreवक्त ने लम्हें सजाए, तुम नहीं आए।ढल गये रातों के साये, तुम नहीं आए। कदमों की आहटों पे, दिल हो
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