दोहा
पूजित प्रथम गणेश जी, नहीं रहा क्या ध्यान।मानव में नित बढ़ रहा, स्वार्थ और अभिमान।। श्री गणेश भगवान जी, करिए
Read Moreयोग दिवस छाया है इस वर्ष भी, योग दिवस का शोर।हर मुख पर मुस्कान है, भीतर नाचे मोर।एक दिना के
Read Moreकर्महीन के पास हैं, चिंता और अवसाद। कर्मयोग के साथ हैं, फर्स अर्श की खाद।। कर्ता को ना चाह है,
Read Moreनन्हे-नन्हे पाँव में,चंचलता की धूप।घर-आँगन महका उठे,हँसी बने स्वरूप॥ कूदें, नाचें, गुनगुनाएँ,भरें खुशी के रंग।भोले मन की खिलखिली,सबसे प्यारा ढंग॥
Read Moreहमने जिसको अपना समझा, विश्वास जताया,लूट रहे अपनों को अपने, देख कर मन घबराया।जिन लोगों से बात करी थी, सबसे
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