मुक्तक/दोहा

मुक्तक/दोहा

दोहा श्रद्धा सुमन

माँ कुष्मांडा ध्याइये प्राणशक्ति संचार।वरदायिनी मंगलकरनि सूक्ष्म जगत आधार।। शुद्ध स्वरूपा भगवती करुणामयी कामारि।जगजननी त्रिपुरेश्वरी बीजमंत्र हीं मानि।। भयहारिणी मंगलकरनि

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