दोहा
शोक मना के कर दिया,पूरा अपना फर्ज।बच्चे जो जलकर मरे,चढ़ा गये हैं कर्ज।। कितनी सस्ती हो गई,अब बच्चों की जान।भृष्टाचारी
Read Moreसबके मन में दर्द है, सबकी अपनी पीर।हँसते चेहरे ढाँपते, भीतर की तस्वीर॥ धूप मिली तो क्या हुआ, छाया भी
Read Moreनन्हे-नन्हे पाँव हैं, सपनों की उड़ान।बचपन की किलकारियाँ, घर की हैं पहचान॥ साइकिल, गुड़िया, खिलौने, मन में भरे उमंग।हँसते-गाते बालपन,
Read Moreमन में हो सद्भावना, अच्छे सोच विचार।बोले मधुर बोल से, रखता शिष्टाचार।।मानव पावन सा लगे, सच में देव समान।सदा भले
Read Moreमाटी का यह घर कहे, सुन लो मेरी बात,दीवारों में कैद हैं, अब गुजरी औकात॥ कभी जला चूल्हा यहाँ, गूँजी
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