काल
काल के अधीन सब, कौन जिया या कौन मरा,मौत कब कहाँ लिखी, बचपन जवानी या जरा?कामना करते हैं सब, कुशल
Read Moreकहिये मेघों से जरा, ना बरसे घनघोर,नदी उफनती बह रही, साजन हैं उस छोर। गरज रहे हैं बादरा, आंधी का
Read Moreजलकर खाक मकान है, रोए हर दीवार।माफ़ी से कब जुड़ सके, टूटा अब संसार॥ चूल्हे, चौखट, छत जली, जले सभी
Read Moreचलन बहू का क्या कहूं, फूटी है तकदीर।घर में मुझको मिल गई, बेढंगी तस्वीर।।१. घूंघट में थी सादगी, उसे बताएं
Read Moreअख़बारों में कुछ बचा, ज़िंदा ज़मीर आज।तारीख़ और वार का, रखते जो अंदाज़।। मौत ज़मीरों की हुई, कैसी उठी पुकार।सच
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