बाल साहित्य

बाल कविता

आँगन की क्रिकेट

नन्हे हाथों में बल्ला है,आँखों में अरमान।आँगन ही बन गया आज,सपनों का मैदान॥ हँसी-ठिठोली, दौड़-भाग,मस्ती की भरमार।जीत-हार से दूर हैं,प्यारा

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बाल कविता

पापा के कंधों पर

पापा के कंधों चढ़ा,नन्हा देखे गाँव।छोटी-सी मुस्कान में,बसता सारा ठाँव॥ आँखों में उत्साह है,मन में नूतन ज्ञान।पेड़ों-पंछी से करे,हर पल

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बाल कविता

बाल कविता – मेरे प्यारे पिता जी

मेरे प्यारे पिता जी हैं,सबसे अच्छे साथी।मुझे खिलाते, मुझे हँसाते,बातें करते प्यारी।उँगली पकड़ चलना सिखाया,सही राह दिखलाई।गिर जाऊँ जब खेल-खेल

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