बाल कविता

मैं हिम्मत तुझसे लेता हूं

चंदामामा मुझे रोज कहें, हर रोज दूध तू पी लेना, मां दूध का प्याला दे देना, मैं चाहूं स्वस्थ हो जी लेना, पानी में आटा घोलके तू, मत कहना पी ले दूध जरा, इससे बेहतर है साफ कहो, नहीं दूध के पैसे समझ जरा. इतना तो नादान नहीं मैं, आखिर मां तेरा बेटा हूं, तेरी […]

बाल कविता

सागर-महासागर बन जाएं

छोटी-छोटी खुशी से ही ‘गर हम खुश हो जाएं, खुशियों का भंडार भर जाए, जीवन संवर जाए! छोटी-छोटी बातों-मुलाकातों पर ग़ौर किया जाए, शायद वो ही कभी बड़ी उपलब्धि बन जाएं! छोटी-छोटी हार से निराश क्यों हुआ जाए, शायद किसी दिन आशा का सूर्य चमक जाए! छोटी-छोटी उलझन को साहस से सुलझाया जाए, शायद यही […]

बाल कविता

नशा नाश का कारण

नशा नाश का कारण होता, तन-मन-धन का करता नाश, आत्मा तक भी बिक जाती है, परिवार का सत्यानाश! मोबाइल भी एक नशा है, सीमित हो इसका उपयोग, आंखें भी धोखा दे जातीं, लग सकते हैं और भी रोग. खुद भी समझें बात पते की, नशा बड़ों का भी छुड़वाएं, नशा मुक्त भारत बनाएं, आओ यह […]

बाल कविता

जय भारत मैं गाऊं

मन करता है जय भारत, जय-जय भारत मैं गाऊं, जय भारत, जय भारत गा, गणतंत्र दिवस मैं मनाऊं. उठते-बैठते, सोते-जागते जय भारत मैं गाऊं, चलते-फिरते, दौड़ते-भागते जय भारत मैं गाऊं. गंगा-सा पावन मन लेकर, काम सभी के आऊं, हिमगिरि-सा हो अटल इरादा, देश का मान बढ़ाऊं. बादल से सीखूं मैं उड़ना, पंछी जैसे गाऊं, फूलों […]

बाल कविता

“जय हिंद” मीठा सपना सुरंगा

“जय हिंद” केवल नारा नहीं है, “जय हिंद” में है हिंदुस्तान, “जय हिंद” है वीरों की शक्ति, “जय हिंद” है आत्मसम्मान. “जय हिंद” कहते-कहते चले थे, वीर अमर जो सैनानी, हंसते-हंसते देश की खातिर, दे गए जान की कुर्बानी. “जय हिंद” है संगठन की शक्ति, “जय हिंद” स्वाभिमान की भक्ति, “जय हिंद” अपना स्वार्थ छोड़ना, […]

बाल कविता

हार को ही उपहार बना लो

हार को ही उपहार बना लो, तमस को उजियार बना लो, ढूंढने से आनंद मिलेगा न कहीं, आनंद को जीने का आधार बना लो. हार भी है एक सबक प्यारा, हार को आगोश में भर बढ़ते जाओ, तब हार भी छिपने को खोजेगा कोना, तुम जीत के उसे श्रंगार बनाओ. विश्वास हमारा अमर सदा, असफलता […]

बाल कविता

रहते सूरज इतनी दूर

रहते सूरज इतनी दूर। फिर भी दें गर्मी भरपूर।। देर नहीं पल की भी करते। अंबर में तुम नित्य विचरते।। दुनिया में फैलाते नूर। रहते सूरज इतनी दूर।। गर्मी वर्षा या हो शीत। कभी नहीं होते विपरीत।। सूर सदा रहते हैं सूर। रहते सूरज इतनी दूर।। सबसे पहले तुम जग जाते। उषा – किरण ले […]

बाल कविता

महक परांठे की

सुबह शाम पड़ती है भैया ठंड कड़ाके की। और रात की ठंडक तो है, धूम धड़ाके की। सुबह-सुबह की हालत तो मत, पूछो रे भैया। सी-सी करते बदन काँपता, है मोरी दैया। राह कठिन सच में होती है, हाय बुढ़ापे की। मफलर स्वेटर काम न आये, दाँत बजे कट-कट। अदरक वाली चाय पी रहे, लोग […]

बाल कहानी

बालकहानी : वनदेवी

जैसे ही शिखर को पता चला कि चंदा हथिनी के दल का एक बुजुर्ग हाथी तालगाँव के समीप नर्रा जंगल में अपने दल से बिछुड़ कर इधर-उधर भटक रहा है ; वह तुरंत , ‘ हाथी देखने जा रहा हूँ दीदी… ‘ , कहते हुए विभा के मना करने के बावजूद घर से निकल पड़ा। […]

बाल कविता

बाल गीत – नव प्रभात अब आया है

नई उमंगे सँग में लेकर नव प्रभात अब आया है। बुरा समय अब बीत गया है नई किरण इक आई है । चहुंदिश फैल रहा उजियारा, खुशहाली अब छाई है। बनी रहे हरदम खुशहाली,  गीत सभी ने गाया है। नई उमंगे सँग मे लेकर  नव प्रभात अब आया है।।1।। नए वर्ष में हम सब मिलकर […]