बाल साहित्य

बाल कहानी

पापा के कंधों पर

पापा के कंधों चढ़ा,नन्हा देखे गाँव।छोटी-सी मुस्कान में,बसता सारा ठाँव॥ आँखों में उत्साह है,मन में नूतन ज्ञान।पेड़ों-पंछी से करे,हर पल

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बाल कविता

तिरंगा लेकर बालक

हाथ तिरंगा ले खड़ा, नन्हा राजकुमार।चित्र-पुस्तक में खोजता, सपनों का संसार॥ फल-सब्ज़ी, वाहन सभी, देखे लेकर चाव।खेल-खेल में सीखता, ज्ञान

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बाल कविता

बाल कविता – मेरे प्यारे पिता जी

मेरे प्यारे पिता जी हैं,सबसे अच्छे साथी।मुझे खिलाते, मुझे हँसाते,बातें करते प्यारी।उँगली पकड़ चलना सिखाया,सही राह दिखलाई।गिर जाऊँ जब खेल-खेल

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