बाल साहित्य

बाल कविता

बालगीत – मोबाइल के सब मतवाले

मोबाइल के सब मतवाले।खेल खेलते नए निराले।। ‘गुल्ली डंडा’ ‘आँख मिचौनी’।नहीं खेलते छौना – छौनी।।‘हरियल डंडे’ पर भी ताले।मोबाइल के

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बाल कविता

प्यारे बच्चे

नन्हे-नन्हे प्यारे बच्चे,हँसते और मुस्काते।मिल-जुलकर जब खेलें सारे,मन को बहुत लुभाते। झूला झूलें, खेलें-कूदें,खुश होकर इतराते।कभी खिलौने, कभी कहानी,मिलकर खूब

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बाल कविता

प्यारी चिड़िया रानी

सुबह-सुबह नन्ही चिड़िया,आँगन में जब आती है।फुदक-फुदक कर चूं-चू करती,मीठे गीत रोज सुनाती है।। चिड़िया फुर्र-फुर्र उड़ती है,चोंच से दाने

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