बाल कविता – कागज का नाव बनाते
पानी-पानी हो गयी धरतीपानी ही पानी चारो ओर काग़ज़ का नाव बनातेचुनमुन और मुनमुन पानी की लहरों मेंनाव चलातेउछल-उछल करनाव
Read Moreपानी-पानी हो गयी धरतीपानी ही पानी चारो ओर काग़ज़ का नाव बनातेचुनमुन और मुनमुन पानी की लहरों मेंनाव चलातेउछल-उछल करनाव
Read Moreबचपन की प्यारी मस्ती,हँसी में छुपी खुशबू।दोस्तों संग खेलते हैं,हर दिन हो नया धूम। बारिश की बूँदों में,कागज़ की कश्ती
Read Moreमेढकी एक दिन मेढक से बोली,तुम ले चलो हमको नदी किनारे।ये गर्मी का मौसम जो आया है,नहाना चाहती हूँ मैं
Read Moreनन्हा मोनूपढ़ना चाहता हैऔर बच्चों की तरहवह भी पतंगउड़ाना चाहता हैआसमां मेंवह तितलियों सेखेलना चाहता हैमोहल्ले के बच्चों संगपर उसके
Read Moreचींटी रोज मेरे घर आती है,झोले में रखे गुड़ खाती है। गुड़ खा-खाकर खूब हंसती हैं,अपने बच्चों को भी लाती
Read Moreधूम रसायन से भर डाला।नील गगन काला कर काला।। औंधा है ज्यों बड़ा कटोरा।नहीं समझना ओढ़ा बोरा।।सहज स्वच्छ हो गगन
Read Moreकुर्सियों का किला बनाया,घर के बीचों-बीच।तीनों बच्चे खेल रहे थे,खुशियाँ लेकर नीड़। कुशन रखकर छत बना ली,दीवारें भी चार।छोटा-सा वह
Read Moreकभी न कहें जो ‘ना’ वो नानी है,नाना-नानी की गोदी प्यारी,मिलतीं वहाँ मनचाही चीजें,नखरे उठाती नानी हमारी। नानी का घर
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