दशहरा पर्व : सत्य की विजय
दशहरा आया खुशियाँ लाया,सत्य-विजय का पर्व सुहाया।राम ने रावण को हराया,धर्म का उज्ज्वल दीप जलाया।बुरे विचारों को दूर भगाएँ,मन में
Read Moreदशहरा आया खुशियाँ लाया,सत्य-विजय का पर्व सुहाया।राम ने रावण को हराया,धर्म का उज्ज्वल दीप जलाया।बुरे विचारों को दूर भगाएँ,मन में
Read Moreढोल नगाड़े बजते देखो, दशहरा पर्व है आया,सत्य की जीत का संदेशा, बच्चों के मन को भाया।राम ने रावण को
Read Moreछुक-छुक करती रेल है, लेकर नई उमंग।बच्चे बैठे खिड़कियों, इक दूजे के संग॥ लाल-हरी ये रेल है, डिब्बे लगे कतार।सीटी
Read Moreमोबाइल के सब मतवाले।खेल खेलते नए निराले।। ‘गुल्ली डंडा’ ‘आँख मिचौनी’।नहीं खेलते छौना – छौनी।।‘हरियल डंडे’ पर भी ताले।मोबाइल के
Read Moreवैद्यराज ने बीमारी में,मुझको दी थीं पुड़ियाँ चार पुड़ियों में था लाल रंग का,एक कसैला चूरन साखाना पड़ा मुझे वह
Read Moreनन्हे-नन्हे प्यारे बच्चे,हँसते और मुस्काते।मिल-जुलकर जब खेलें सारे,मन को बहुत लुभाते। झूला झूलें, खेलें-कूदें,खुश होकर इतराते।कभी खिलौने, कभी कहानी,मिलकर खूब
Read Moreदो दीप जले थे भारत में,जिनसे जगमग देश हुआ।गांधी जी ने सत्य सिखाया,अहिंसा का संदेश दिया।सादा जीवन, ऊँचे विचार,बापू की
Read Moreसुबह-सुबह नन्ही चिड़िया,आँगन में जब आती है।फुदक-फुदक कर चूं-चू करती,मीठे गीत रोज सुनाती है।। चिड़िया फुर्र-फुर्र उड़ती है,चोंच से दाने
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