मैं नदी हूँ
विधा – बाल कविताविषय – मैं नदी हूँ मैं नदी हूँपर्वतों से निकलती हूँखेतों और घाटियों से होती हुईआगे बढ़ती
Read Moreविधा – बाल कविताविषय – मैं नदी हूँ मैं नदी हूँपर्वतों से निकलती हूँखेतों और घाटियों से होती हुईआगे बढ़ती
Read Moreविधा- बाल कविताशीर्षक- तितली रानी मैं रंग बिरंगी तितली रानी, फूलों का रस लेती हूँ,कहते सभी सयानी हूँ, बच्चों को
Read Moreविधा- कविताशीर्षक- हर घर तिरंगा लहराएंगे ध्वज प्रतीक है राष्ट्र का,हम इसकी शान बढ़ाएंगे,साहस के पुतले बनकर,हर घर तिरंगा लहराएंगे।
Read Moreनन्हा मुस्कान खिलता रहे,खुशियों की बारात चले।हर दिल में हो प्यार बसाए,हर पल हँसी गाए। चंदा मामा देखे नीचे,सितारे चमकें
Read Moreमुझको बड़ा सुहाना लगता,कोई भी हो मेला,मेले में हो सजे-सजाए,लोगों का बस रेला। कुल्चे-छोले-रबड़ी-कुल्फी,खेल-खिलौने न्यारे,झूले-हाथी-ऊंट सवारी,मेले के खेल निराले। —
Read Moreतिरंगा प्यारा-प्यारा है,भारत देश हमारा है।केसरिया देता बलिदान,सफेद सिखाता शांति महान।हरा रंग खुशहाली लाए,नीला चक्र आगे बढ़ाए।पंद्रह अगस्त का दिन
Read Moreनन्हे हाथों में सजे,सपनों के संसार।पापा संग मुस्कान यह,करती मन गुलज़ार॥ नटखट आँखें बोलतीं,भोले-भोले बोल।इनकी प्यारी शरारतें,मन में भरतीं घोल॥
Read Moreसुबह-सुबह सूरज मुस्काए ,आँगन में छाया उजियारा।बस्ता लेकर चल पड़ते हम, हमें स्कूल लगता प्यारा।ज्ञान की बातें, खेल निराले, मिलते
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