तिरंगा लेकर बालक
हाथ तिरंगा ले खड़ा, नन्हा राजकुमार।
चित्र-पुस्तक में खोजता, सपनों का संसार॥
फल-सब्ज़ी, वाहन सभी, देखे लेकर चाव।
खेल-खेल में सीखता, ज्ञान भरे पड़ाव॥
नन्हे-नन्हे हाथ में, भारत की पहचान।
लिए तिरंगा बोलता, मेरा देश महान॥
पढ़-लिखकर आगे बढ़े, मन में लिए उजास।
मेहनत से चमके सदा, उसका हर विश्वास॥
बाल हृदय निर्मल बहुत, सपने हैं भरपूर।
कल का उज्ज्वल नागरिक, होगा यही जरूर॥
ज्ञान, संस्कारों सहित, बढ़ता जाए रोज़।
भारत माँ के मान का, बन जाएगा ओज॥
सच्चाई के मार्ग पर, रखे सदा वह पाँव।
अपने अच्छे कर्म से, पाए जग में ठाँव॥
सदा तिरंगे छाँव में, पले देश का प्यार।
नन्हा बालक एक दिन, होगा श्रेष्ठ सितार॥
— डॉ. सत्यवान सौरभ
