आत्मकथा : एक नज़र पीछे की ओर (कड़ी 12)
सेवा शाखा का कार्य मैं बता चुका हूँ कि उस समय हमारे बैंक की कानपुर की सेवा शाखा का काफी
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Read Moreइससे पहले का वाकया है जब हम दो पार्टनर रह गये थे मैं व ताराचन्द, तो एक सीजन हमारे पास
Read Moreमौत के गड्ढे से बचना हम कानपुर से प्रायः हर तीसरे-चौथे महीने आगरा जाया करते थे, क्योंकि वाराणसी की तुलना
Read Moreसुभाष को पतंग उड़ाने का बहुत शौक था। स्कूल से आकर पतंगबाजी में लग जाता। मेरी मजबूरी थी। बच्चों को
Read Moreमेरठ में प्राकृतिक चिकित्सा कानपुर में डा. आनन्द से असफल चिकित्सा कराने के बाद भी मैं योग करने उनके मोतीझील
Read Moreहमारे साथियों ने अलग होकर पेशावर फ्रूट कं. नाम रखा। उनकी मुहूरत वाले दिन जब गुरुग्रंथ साहब के पाठ की
Read Moreउस विज्ञापन के आधार पर मुझे दो पत्र मिले। इनमें एक पत्र मै. पुस्तक महल, दिल्ली के स्वामी श्री राम
Read Moreउन दिनों पृथ्वीराज की तबीयत काफी खराब थी और रुपये की भी बहुत मजबूरी थी। एक दिन पृथ्वीराज की तबियत
Read Moreकम्प्यूटर विभाग में नये सहयोगी मैं ऊपर लिख चुका हूँ कि एडवांसशीट के कार्य के कारण मंडलीय कार्यालय से हमारा
Read Moreपृथ्वीराज पर अनहोनी हो चुकी थी। उसकी सेहत के बारे में हर समय फिक्र रहती थी कि होनहार बच्चा था।
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