किस्मत : भाग 4
कॉलेज का वातावरण अब पूरी तरह रंग पकड़ने लगा था। विद्यार्थियों ने अपनी-अपनी मंडलियाँ बना ली थीं—कहीं हँसी-ठिठोली के साथ
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Read Moreपाँच दिन की छूट्टियाँ बिता कर जब ससुराल पहुँची तो पति घर के सामने स्वागत में खड़े थे। अंदर प्रवेश
Read Moreमहेश और सुरेश दोनों सगे भाई, लेकिन दोनों के व्यवहार में जमीन- आसमान का अंतर! यहां तक की एक तो
Read Moreकश्मीर की वादियों में उस सुबह झेलम की धारा कलकल करती बह रही थी। डल झील पर हल्की धुंध तैर
Read Moreलाइब्रेरी की बड़ी-बड़ी खिड़कियों से दोपहर की सुनहरी धूप लंबी लकीरों की तरह अंदर उतरकर किताबों पर बिखर रही थी।
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Read Moreघर के आँगन में पीपल का पुराना पेड़ खामोशी से खड़ा था। उसकी छाँव में खेलते हुए बीते साल जैसे
Read Moreअभी तक हमने पढ़ा कि सुमि ने कॉलेज में एडमिशन ले लिया है और अपने दोस्तों के साथ वो अपनी
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