विंडो सीट (भाग -1)
गर्मियों की छुट्टियों के समय कन्फर्म सीट मिलना कोई आसान बात न थी । भतीजी की सगाई एकदम से तय
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Read More“लो भागवान ! आ गए ट्रांसफर के आर्डर। चलो अब दिल्ली चलने की तैयारी कर लो।” सुमि के पिता जी
Read Moreनंदिता रोज अपनी लिखी एक कविता फेसबुक पर पोस्ट करती। सुबह फ्रेश होने के बाद चाय पीकर कविता लिखने बैठ
Read Moreरीता जी एक बैंक में कैशियर के पद पर कार्यरत हैं। पतिदेव एक मल्टीनेशन कंपनी में जनरल मैनेजर है ।
Read Moreमैं उसकी जादूगरी में गिरफ़्तार होता चला गया , उस से मेरी मुलाक़ात कोई ज़्यादा पुरानी न थी , और
Read Moreरक्षाबंधन की सुबह थी। मुंबई के एक छोटे से अपार्टमेंट में रहने वाली श्रद्धा की आँखें अलार्म के तीसरी बार
Read Moreअहमदाबाद की बारिश जैसे शहर को नहीं, रागिनी के भीतर के सूनेपन को भिगो रही थी। खिड़की के बाहर रुक-रुक
Read Moreकभी-कभी ज़िंदगी के सबसे बड़े सबक किसी स्कूल या किताब से नहीं, बल्कि एक साधारण से घर में, एक सादी-सी
Read More“हैलो !” एक अनजान नंबर से महिला की आवाज आई।दीपक थोड़ी -सी घबराहट से जवाब देते हुए कहा,”जी…नमस्ते।”“मैं सुधा बोल
Read Moreबाबा नौकरी में थे। जब तक कमाते रहे, बेटा-बहू बड़ा अच्छा व्यवहार करते थे, पूछ-पूछकर खाना देते, हाल-चाल पूछते, सब
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