इंसानियत — एक धर्म ( द्वितीय भाग )
आलम की गिरफ्त से छूटने के लिए कसमसाती राखी की तरफ बढ़ते हुए मुनीर ने अपनी शंका आलम से साझा
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Read Moreराखी और रमेश अपनी कार में बैठे बड़ी तेजी से अपने घर की तरफ बढे जा रहे थे । शाम
Read Moreस्कूल से छूटकर साइकिल से घर आ रहा था देवम। तभी पीछे से आती हुई कार का दरवाजा खुला और
Read Moreविनोद की मनुहार से आनंदित दरोगा दयाल ने आगे कहना शुरू किया ” विनोद जी ! सबसे पहले तो मैं
Read Moreबच्चों की बात सुनकर विनोद को राहुल की समझदारी का अहसास हुआ और साथ ही यह भी अहसास हुआ कि
Read Moreदारोगा दयाल एक कुशल चालक भी था और इस समय वह अपनी पूरी कुशलता से जीप को उसकी क्षमता के
Read Moreदरोगा दयाल ने पीछे मुड़कर देखा और वह दृश्य देखकर वह भी आश्चर्यचकित रह गया । पल भर के लिए
Read Moreकमाल के हाथों से लाइसेंस लेकर उसके पन्ने पलटते हुए दयाल ने सरसरी निगाहों से उसका निरिक्षण करते हुए उसे
Read Moreटेम्पो के करीब पहुंचा रामसहाय उस के करीब किसी को न पाकर टेम्पो के पीछे की तरफ एक डंडा फटकारते
Read Moreअबकी बार वो आया मेरी बहन बनकर । मैंने उससे प्रार्थना की थी मुझे गुरु दक्षिणा देनी है रास्ता मुझे
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