लघु उपन्यास: रघुवंशी भरत (कड़ी 3)
अवध से केकय तक का सारा मार्ग उन दूतों द्वारा देखा हुआ था। वे वहाँ पहले भी जा चुके थे।
Read Moreअवध से केकय तक का सारा मार्ग उन दूतों द्वारा देखा हुआ था। वे वहाँ पहले भी जा चुके थे।
Read Moreमहाराज दशरथ के शव को सुरक्षित कराने के बाद गुरु वशिष्ठ, मार्कडे, वामदेव, कश्यप, जाबालि आदि ऋषि, सभी मंत्री और
Read Moreमहामंत्री सुमन्त्र से श्री राम के चित्रकूट की ओर निकल जाने का समाचार पाकर महाराज दशरथ श्री राम के वियोग
Read Moreहमारे पौराणिक इतिहास में ‘भरत’ नाम के कम से कम चार महापुरुष हुए हैं- एक, ऋषभदेव या आदिनाथ के पुत्र
Read Moreसाढ़े पांच फीट का दुबला-पतला व एक फेफड़ा का यह इंसान, जहाँ सेक्स की बातों में मानों Ph.D. प्राप्त कर
Read Moreअवसर पाते ही उन्होंने विदुर से एकान्त वार्ता करने की इच्छा प्रकट की। विदुर भी सोच रहे थे कि यदि
Read Moreअपने निकट सम्बंधी पांडवों के आग में जलकर मर जाने का समाचार शीघ्र ही द्वारिका में भी पहुँच गया। महारानी
Read Moreइधर दुर्योधन ने पांडवों के लिए शोक करने का दिखावा तो किया, किन्तु उसे पूरी तरह विश्वास नहीं हुआ कि
Read Moreइधर हस्तिनापुर में जब यह समाचार पहुँचा कि जिस भवन में पांडवों ठहरे हुए थे उसमें आग लग गयी है
Read More‘शिव भवन’ की आग से बचकर पांडव वन मार्ग से गंगा नदी की ओर जा रहे थे। माता कुंती को
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