आल्हा छंद

कवितापद्य साहित्य

आल्हा छंद “अग्रदूत अग्रवाल”

अग्रोहा की नींव रखे थे, अग्रसेन नृपराज महान। धन वैभव से पूर्ण नगर ये, माता लक्ष्मी का वरदान।। आपस के

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कविता

अबकी बजने दे रणभेरी (आल्हा छंद)

धूल उड़ी फिर समरांगन की, भारतमाता रही पुकार। भगवाबाना धारो वीरों, चलों चलें हम शस्त्रागार॥ गुंजित हो जिनके आँगन में,

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