पानी की जात
पिंकी बर्तन पकड़े चुपचाप अपनी अम्मा के पीछे चल रही थी। आज फिर पानी लाने के चक्कर में उसका स्कूल
Read Moreपिंकी बर्तन पकड़े चुपचाप अपनी अम्मा के पीछे चल रही थी। आज फिर पानी लाने के चक्कर में उसका स्कूल
Read More“तुमने इस स्कूव में दाखिला क्यों लिया। यहाँ पढ़ाई नहीं होती है।” राजेश ने अपने चचेरे भाई विपिन से कहा।
Read Moreठसाठस भरे होने के बावजूद भी पांडाल में पूर्ण शांति थी। स्वामी जी अपने प्रवचन के बाद देश-विदेश से आये
Read Moreकैलाश समझ नही पा रहे थे कि उनकी जीवन संगिनी वृंदा इतनी चुप क्यों है। सुबह से कितनी बार पूँछ
Read Moreवह बोल नही सकता था. टूरिस्ट स्थान पर वह कागज़ पेंसिल लेकर बैठा था. कुछ ही मिनटों में आपका चेहरा
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