धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

विजय का शंखनाद

‘जय विजय पत्रिका’ खोलते ही परम पवित्र माने जाने वाले शंख के दर्शन होते हैं और इसके साथ ही मन में गूंज उठता है, ‘विजय का शंखनाद’. धार्मिक ग्रंथों के अनुसार समुद्र मंथन से प्राप्त 14 रत्नों में से एक शंख को सुख-समृद्धि और निरोगी काया और साथ में माया का प्रतीक माना जाता है. इस मंगलचिह्न को घर के पूजा स्थल में रखने से जहां अरिष्टों और अनिष्टों का नाश होता है, सौभाग्य वृद्धि भी होती है.

शिव को छोड़कर सभी देवताओं पर शंख से जल अर्पित किया जा सकता है. शिव ने शंखचूड़ नामक दैत्य का वध किया था अत: शंख का जल शिव को निषेध बताया गया है. शंख के नाम से कई बातें विख्यात है जैसे योग में शंख प्रक्षालन और शंख मुद्रा होती है, तो आयुर्वेद में शंख पुष्पी और शंख भस्म का प्रयोग किया जाता है. प्राचीनकाल में शंक लिपि भी हुआ करती थी. विज्ञान के अनुसार शंख समुद्र में पाए जाने वाले एक प्रकार के घोंघे का खोल है, जिसे वह अपनी सुरक्षा के लिए बनाता है.

शंख से वास्तुदोष ही दूर नहीं होता, इससे आरोग्य वृद्धि, आयुष्य प्राप्ति, लक्ष्मी प्राप्ति, पुत्र प्राप्ति, पितृ-दोष शांति, विवाह आदि की रुकावट भी दूर होती है. इसके अलावा शंख कई चमत्कारिक लाभ के लिए भी जाना जाता है. उच्च श्रेणी के श्रेष्ठ शंख कैलाश मानसरोवर, मालद्वीप, लक्षद्वीप, कोरामंडल द्वीप समूह, श्रीलंका एवं भारत में पाये जाते हैं.

वर्तमान समय में शंख का प्रयोग प्राय: पूजा-पाठ में किया जाता है, अत: पूजारंभ में शंखमुद्रा से शंख की प्रार्थना की जाती है. विजय भाई ने पत्रिका का प्रारम्भ शंखनाद से किया है. आपने महाभारत आदि सीरियल्स और फिल्मों में ‘विजय का शंखनाद’ तो अवश्य सुना होगा. यह शंखनाद विजय की सूचना देने के लिए होता है. यहां ‘विजय के शंखनाद’ की ही महिमा है, कि पत्रिका उत्तरोत्तर विकास की सीढ़ियां चढ़ती जा रही है. इस पत्रिका के उच्चतम स्तर को बनाए रखने के लिए विजय भाई समेत सभी लेखक-लेखिकाएं निरंतर प्रयत्नशील हैं.

पुनश्च- शंख में मोटे-मोटे शब्दों में कलात्मक रूप से अंकित इस पत्रिका का ध्येय वाक्य ”उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरावरान्निबोधत” मंत्र भी विजय के शंखनाद को और अधिक पवित्रता प्रदान करते हुए अभिमंत्रित व अभिसिंचित करता है.

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244

8 thoughts on “विजय का शंखनाद

  • राज किशोर मिश्र 'राज'

    जब से आपको देखा बहना— लिखना अच्छा लगता है ———–

    • लीला तिवानी

      प्रिय राजकिशोर भाई जी, हमें भी आपके कलम-दर्शन अच्छे लगते हैं.

  • राज किशोर मिश्र 'राज'

    प्रणाम बहन जी -विजय का शंखनाद शंख महात्म्य का मार्मिक विश्लेषण के लिए आभार / पत्रिका के संपादक आदरणीय सिंघल जी का तहेदिल आभारी हूँ/ पत्रिका मे हर माह मुझ अकिंचन की कविता को मान देते है /

    • लीला तिवानी

      प्रिय राजकिशोर भाई जी, यह आपके लेखन और विजय भाई के चयन का कमाल है.

  • विजय कुमार सिंघल

    बहुत बहुत आभार, बहिन जी !

    • लीला तिवानी

      प्रिय विजय भाई जी, आपके प्रेरणा-स्तंभों का आभार.

  • गुरमेल सिंह भमरा लंदन

    लीला बहन , शंख की महमा आप ने बताई , बहुत अच्छी लगी और साथ ही विजय भाई की इस पत्रिका को उन्ती की ओर की जा रही कोशिश को शंख से तुलना बहुत अच्छी लगी .

    • लीला तिवानी

      प्रिय गुरमैल भाई जी, बहुत-बहुत आभार.

Comments are closed.