गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

तनहाईयों में मैं रोता हूँ याद करके तुम्हें अश्कों से तकिए भिगोता हूँ याद करके तुम्हें बर्दाश्त होती नहीं आज की हकीकतें जब पुरानी यादों में खोता हूँ याद करके तुम्हें मुझे खबर है कि तुम मेरे हो नहीं सकते फिर भी सपने संजोता हूँ याद करके तुम्हें वादा था तेरा इक रात मुझसे मिलने […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

गुज़र जाएगी यह शब हौसला रख सुबह के वासते दर को खुला रख सज़ा दे-दे या खुद को माफ़ करदे अंधेरे में न तू यूँ फैसला रख वो मुंसिफ़ कुछ नहीं सुनता किसी की न उसके पास अपना मामला रख कई मज़लूम होंगे इस जहाँ में सभी के वासते लब पर दुआ रख न रो-रो […]

संस्मरण

संस्मरण

यूँ तो बात बहुत पुरानी है पर है पते की। 1970 के दशक का दौर था मेरे अनुज की शादी में राजदूत मोटर सायकल दहेज़ में मिलने वाली थी। उस वक्त सपने में सायकल ही बड़ी मुश्किल से आती थी यहाँ तो फड़फड़िया फड़फड़ा रही थी। दहेज़ जरुरत तो कभी न रहा हाँ सम्मान पर […]

समाचार

श्री रविदेव गुप्त के साथ देहरादून स्थित गुरुकुल पौन्धा एवं वैदिक साधन आश्रम तपोवन की यात्रा

ओ३म् दिल्ली में ‘दक्षिण दिल्ली वेद प्रचार मण्डल’ के अध्यक्ष, आर्यसमाज सफदरगंज के प्रधान और एकल विद्यालय फाउण्डेशन आफ इण्डिया के महासचिव, ऋषि और आर्यसमाज भक्त श्री रविदेव गुप्त जी से आज प्रथमवार देहरादून के एक भव्य होटल में भेंट हुई। इसके बाद उनके साथ देहरादून के प्रसिद्ध गुरुकुल आश्रम, पौन्धा तथा महात्मा आनन्द स्वामी […]

कविता

“शोकहर छंद”

आज मजदूर दिवस पर सभी मजदूर भाई बहन को सादर प्रणाम, एवं हार्दिक बधाई मजदूरों की मज़बूरी को, समझो भी अब दाता जी देखों बच्चे झुलस रहे हैं, उनके तुमहि विधाता जी।। कुछ तो सोचो बिगड़ रहा है, भूखा बचपन मरता है ऐसी भी तो हाल नहीं है, मजदूरी क्युं करता है।। कल करखाने किसके […]

अन्य लेख

श्रमिक दिवस

1 मई यानी श्रमिक दिवस पर विशेष अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस को अंतरराष्ट्रीय मज़दूर दिवस और मई दिवस के नाम से भी जाना जाता है, जो अंतरराष्ट्रीय श्रमिक संघ को प्रचारित और बढ़ावा देने के लिये अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनाया जाता है. इसे पूरे विश्व भर में 1 मई को मनाया जाता है. आठ घंटे के […]

कविता

नन्हे-श्रम-स्वेद-बिन्दु

मेरे इन बालअश्रुओं में मेरे नन्हे-श्रम-स्वेद-बिन्दु भी मिले हुए हैं । मेरा बचपन नहीं जानता मेरे हाथों को ये काम कब से मिले हुए हैं । माँ के बाद शायद मैंने श्रम को ही जाना है या कि हम दोनों साथ पैदा हुए हैं । कुछ लोग मुझे काम करता देख तरस खाते हैं । […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

क्या लेना है नाम कमाकर अच्छे हैं गुमनाम मियाँ नाम कमाने के चक्कर में हुए व्यर्थ बदनाम मियाँ कहाँ मुरादें मिलती हैं हरइक को दुनिया में आकर अक्सर जाने वालों को जाते देखा नाकाम मियाँ ताक पे रक्खो रिश्तों को जजबात झोंक दो चूल्हे में दिल के मोल पे बिकने वाले मुफ्त़ हुए नीलाम मियाँ […]

ब्लॉग/परिचर्चा राजनीति लेख

अगुस्ता वेस्टलैंड या बेस्टलैंड

इधर सोनिया गाँधी के दिन कुछ अच्छे नहीं चल रहे हैं। राहुल गाँधी से कोई उम्मीद तो बंधी नहीं, उलटे कभी प्रियंका की संपत्ति और राबर्ट वाड्रा विवादों में आकर सोनिया गाँधी की मिट्टी पलीद ही करते रहे हैं। वैसे राजीव गाँधी को जैसे बोफोर्स घोटाला ले डूबा था, कहीं सोनिया गाँधी को भी उनकी […]