Monthly Archives: October 2016

  • आज अमावस की रात

    आज अमावस की रात

    करो न इंतज़ार ,आज अमावस की रात, अपने चाँद का…… आज वह नही उतरेगा,ले संग अपने चाँदनी को फलक में । रोका जो है,उसने अपनी चाँदनी को, है बड़ी शिकायतें उसे अपनी इस हमसाये से। नही...

  • दिवाली

    दिवाली

    जगमग करते रंगबिरंगे दीपों से खुशहाली है ख़ुशी मनाओ जी भर कर के आई आज दिवाली है । । रंग बिरंगे सजे हैं तोरण सजी कहीं रंगोली है कभी धमाके एटम बम के चले कभी भी...


  • कविता : मिट्टी के दीए

    कविता : मिट्टी के दीए

    सधे हुए हाथों से कुम्हार मिट्टी के दीए बनाए ! बिक जाएँ जब दीप सभी घर चुल्हा उसके जल जाए ! ! बिजली की झालरों में दीया कांपती लौ कर जलता जाए ! दे संदेश मिट्टी...

  • कविता : दीपों की अवली

    कविता : दीपों की अवली

    रौशनी के त्यौहार में हम दीपों की अवली जलाएँ ! कुछ खुशियाँ और मुस्कान चलो बुझे चेहरों को हम दे आएँ ! ! चाइनीज झालर का कर बहिष्कार देशभक्ति के दीप जलाएँ ! मिट्टी के दीप...

  • जयकारीछ्न्द

    जयकारीछ्न्द

      समस्त साहित्यकार   मित्रों   को दीपावली के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ ======================================== जयकारी लिख छ्न्द पुनीत , दुनियाँ गाती है यह गीत । चिंटू पिंटू को फटकार , बुढऊ आज रहे ललकार ।...

  • दिवाली और पटाखे

    दिवाली और पटाखे

    दिये की रौशनी में अंधेरों को भागते देखा अपनी खुशियों के लिए बचपन को रुलाते देखा। दीवाली की खुशियां होती हैं सभी के लिए, वही कुछ बच्चों को भूख से सिसकते देखा । दिए तो जलाये...