कविता

आज अमावस की रात

करो न इंतज़ार ,आज अमावस की रात, अपने चाँद का…… आज वह नही उतरेगा,ले संग अपने चाँदनी को फलक में । रोका जो है,उसने अपनी चाँदनी को, है बड़ी शिकायतें उसे अपनी इस हमसाये से। नही चाहता वह कि बिखेरे ,अपनी मोती सी मखमली चादर, आज,जमीं पर सहर आने तक । जब ,चाँदनी भी जिद […]

गीत/नवगीत

दिवाली

जगमग करते रंगबिरंगे दीपों से खुशहाली है ख़ुशी मनाओ जी भर कर के आई आज दिवाली है । । रंग बिरंगे सजे हैं तोरण सजी कहीं रंगोली है कभी धमाके एटम बम के चले कभी भी गोली है तरह तरह पकवानों संग सजती पूजा की थाली है ख़ुशी मनाओ जी भर कर के आई आज […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

एक ही ईश्वर संसार और सभी प्राणियों का जन्मदाता, रक्षक और पालक और वही सबका उपासनीय

ओ३म् यह समस्त संसार या ब्रह्माण्ड किसने बनाया और कौन इस संसार और मनुष्यों सहित सभी प्राणियों का जन्मदाता, रक्षक और पोषक है? इस प्रश्न का उत्तर संसार के लोगों के पास या तो है नहीं और यदि है तो वह अपूर्ण होने से उसे जानकर भी अज्ञानता और स्वार्थपूर्ण आचरण करने से स्वयं की […]

कविता

कविता : मिट्टी के दीए

सधे हुए हाथों से कुम्हार मिट्टी के दीए बनाए ! बिक जाएँ जब दीप सभी घर चुल्हा उसके जल जाए ! ! बिजली की झालरों में दीया कांपती लौ कर जलता जाए ! दे संदेश मिट्टी का ये तन मिट्टी में ही है मिल जाए ! ! अंजु गुप्ता

कविता

कविता : दीपों की अवली

रौशनी के त्यौहार में हम दीपों की अवली जलाएँ ! कुछ खुशियाँ और मुस्कान चलो बुझे चेहरों को हम दे आएँ ! ! चाइनीज झालर का कर बहिष्कार देशभक्ति के दीप जलाएँ ! मिट्टी के दीप जलकर खुशी बुझे चेहरों को हम दे आएँ ! ! अंजु गुप्ता

कविता

जयकारीछ्न्द

  समस्त साहित्यकार   मित्रों   को दीपावली के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ ======================================== जयकारी लिख छ्न्द पुनीत , दुनियाँ गाती है यह गीत । चिंटू पिंटू को फटकार , बुढऊ आज रहे ललकार । सावन भादों बीत कुआर [क्वार] , कातिक दिपावली त्योहार । राज प्रेम से करें प्रणाम , महिमा मंच जगत […]

कविता

दिवाली और पटाखे

दिये की रौशनी में अंधेरों को भागते देखा अपनी खुशियों के लिए बचपन को रुलाते देखा। दीवाली की खुशियां होती हैं सभी के लिए, वही कुछ बच्चों को भूख से सिसकते देखा । दिए तो जलाये पर आस पास देखना भूल गए चंद सिक्कों के लिए बचपन को भटकते देखा। क्या होली क्या दिवाली माँ […]

कविता

मैं कैसे मनाऊँ दिवाली?

मैं कैसे मनाऊँ दिवाली? जब वो खेल रहे है होली! मैं कैसे पटाख़े जलाऊँ? जब वो खून से बना रहे हैं रंगोली!   मैं कैसे शिरा-पूरी खाऊँ? जब वो सरहद पे शिष कटा रहे हैं! मैं कैसे मिठाईयाँ बाँटुं? जब वो मिट्टि में मिल रहे हैं!   मैं कैसे नव-वस्त्र खरीदुं? जब वो तिरंगे  में […]

मुक्तक/दोहा

चाँद सूरज ज़मीं पे उतर आए हैं

चाँद सूरज ज़मीं पे उतर आए हैं। देख साहब यहाँ मन निखर आए हैं । राज वंदन करे चन्द शब्दों में क्या , आज दुनियाँ खुशी के बहर आए हैं । राजकिशोर मिश्र ‘राज’