Monthly Archives: February 2017


  • बदलाव

    बदलाव

    बदल रहा है मानव पल पल बदल रहा संसार बढ़ रहे हैं मकान नफरत के कहीं भी पनप नहीं रहा प्यार बदल गया है बचपन अब तो बदल गए हैं संस्कार बड़े बूढ़ों का आशीर्वाद नहीं...

  • मुहँदेखाई-

    मुहँदेखाई-

    नई बहू के गृहप्रवेश करते ही घर में कानाफूसी शुरू हो गई| “बडे पन्डित बनते है, इन्हें यह भी नहीं पता की राहुकाल में नई बहू को गृहप्रवेश नहीं कराते हैं|” “हाँ री, सुना है बड़ा...

  • कुण्डलियॉ छंद

    कुण्डलियॉ छंद

    वाणी पाणिनि शारदे, भर दो मन विश्वास । शीश किये नत हूँ खड़ी, टूट न जाए आस ।। टूट न जाए आस, ज्ञान का मैया वर दे। सृजन लेखनी धार, हृदय में करुणा भर दे।। अनहद...


  • कहाँ हो तुम

    कहाँ हो तुम

    कहाँ हो तुम सप्ताह के अंत में होता था तुम्हारा आना … वो एक शाम  जो गुजारा करते थे  तुम मेरे नाम …… प्रेम कि उष्णता लिए होंठो पर ढ़ेर सारी मुस्कान बिसराकर सारे गम –...

  • सरस्वती पूजा

    सरस्वती पूजा

    माँ सरस्वती के चरणों में शत शत नमन, –सत्य लेखन ही सरस्वती पूजा है– लेखनी तो सरस्वती है, इसका अपमान न करें, सत्य लिखें सौम्य लिखे, अश्लीलता से दूर रहें, सच चाहे कड़वा भी हो, लेखक...

  • गीत : बदल गया यह लल्ला

    गीत : बदल गया यह लल्ला

    बदल गया यह लल्ला प्रियतम की यादों में खोया, बोलो नहीं  निकम्मा l रूप – पाश  में बँधकर भूला,  भाई, बापू, अम्मा ।। गीत  सिनेमा  का वो गाये,  बहुत  करे   मनमानी । लैला मजनू के सब...

  • गीतिका

    गीतिका

    वंदना प्रमाणिका छंद 12 12 12 12 समांत: आर पदांत -दो सुलेखनी निखार दो सदैव मातु प्यार दो सुधर्म भी सुकर्म भी सुबुद्धि माँ प्रचार दो पढ़े चलूँ लिखे चलूँ कि उच्च माँ विचार दो सुकाव्य...

  • “ग़ज़ल”

    “ग़ज़ल”

    वक्त ने ही हमें सताया है। वक्त ने ही हमें  सम्हाला है। दास्ताँ और से कहें क्या क्या जिन्दगी में सबने रुलाया है। काफिला साथ है मेरे फिर भी; जिन्दगी का बसर ये’ तनहा है। फिक्र...