आई-आई है मेरे अंगनवा

आई-आई है मेरे अंगनवा, मुरलीवाले की प्यारी सवारी
अब तो डंका बजाके कहूंगी, महकी किस्मत की प्यारी फुलवारी-

कभी चलते थे मेरे आगे-आगे, मुझे रस्ता दिखाते बनवारी
उनकी ऐसी अदा पे बलिहारी, महकी किस्मत की प्यारी फुलवारी-

कभी चलते थे मेरे पीछे-पीछे, कहीं रस्ता भटक ही न जाऊं
उनकी ऐसी अदा पे बलिहारी, महकी किस्मत की प्यारी फुलवारी-

कभी चलते थे हाथ पकड़ के, लड़खड़ाके कहीं न गिर जाऊं
उनकी ऐसी अदा पे बलिहारी, महकी किस्मत की प्यारी फुलवारी-

कभी आके नयन मूंदते थे, पूछते कौन मैं तेरी प्यारी
उनकी ऐसी अदा पे बलिहारी, महकी किस्मत की प्यारी फुलवारी-

हर कदम पे प्रभु हैं संग मेरे, उनकी हर इक अदा है निराली
अब तो आए हैं मेरे अंगनवा, जाऊं अपने मोहन पर वारी-

(तर्ज़- मेरे सांवरे-सलोने कन्हैया, तेरा जलवां कहां पर नहीं है——–)

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।