दरबारियों की भीड़ है दरबार से चलो

दरबारियों की भीड़ है दरबार से चलो
डेरा मेरा उस पार है इस पार से चलो ।

किसने ग़लत पता दिया हम आ गये यहाँ
दिल बार – बार कह रहा इस द्वार से चलो ।

रोड़े भी रास्ते में हैं, अवरोध भी हैं ख़ूब
मंज़िल भी  दूर है अभी रफ़्तार से चलो ।

मौसम भी कुछ खि़लाफ़ है ,दरिया भी जोश पर
ख़तरा भी कम नहीं हुआ मंझधार से चलो ।

यह देश तुम्हारा भी है भूलो न मेरे यार
रक्खो ज़मीं पे पाँव तो अधिकार से चलो ।

लड़ते हुए चलोगे तो क्या लोग कहेंगे
दुनिया के वास्ते ही सही प्यार से चलो ।

मुर्गा न बाँग देगा तो होगी नहीं सुबह
सूरज उगे , उगे नहीं अँधियार से चलो ।

परिचय - डॉ डी. एम. मिश्र

उ0प्र0 के सुलतानपुर जनपद के एक छोटे से गाँव मरखापुर में एक मध्यम वर्गीय किसान परिवार में जन्म । शिक्षा -पीएच डी ,ज्‍योतिषरत्‍न। गाजियाबाद के एक पोस्ट ग्रेजुएट कालेज में कुछ समय तक अघ्यापन । पुनश्च बैंक में सेवा और वरिष्ठ -प्रबंघक के पद से कार्यमुक्त । विभिन्न पत्र -पत्रिकाओं में 400 से अधिक रचनाएँ प्रकाशित और कई बार आकाशवाणी व दूरदर्शन से रचनाओं का प्रसारण । ‘इज्जतपुरम्’ , ‘उजाले का सफर’ , ‘ रोशनी का कारवॉ ’ , ‘यह भी एक रास्ता है’ सहित आठ काव्य- कृतियाँ प्रकाशित । ‘‘ आईना - दर - आईना ’’ , गजल संग्रह शीघ्र प्रकाश्य ।कई साहित्यिक और सामाजिक संस्थाओं से पुरस्कृत । अवधी अकादमी का ‘ ‘जायसी पंचशती सम्मान’ , भारत - भारती का ‘ लोकरत्न सम्मान’ , राष्ट्रीय साहित्य पीठ इलाहाबाद द्वारा ‘ भारती -भूषण सम्मान ’ , प्रेमा देवी त्रिभुवन अग्रहरि मेमोरियल ट्रस्ट अमेठी द्वारा प्रशस्ति पत्र , , दीपशिखा सम्मान , रश्मिरथी सम्मान आादि ! सम्पर्क:604, सिविल लाइन, निकट राणा प्रताप पी0जी0 कालेज सुलतानपुर-228001 मो0 9415074318