गीतिका/ग़ज़ल

“गज़ल”

प्यार तुमसे जताती रही रात भर जाग सपने सजाती रही रात भर तुम न आए बहुत बेसहुर से लगे मौन महफिल नचाती रही रात भर॥ बेरहम थी शमा आग बढ़ती गई लौ जली को बुझाती रही रात भर॥ तक रही थी लिए पीर परछाइयाँ धुन्ध छायी हटाती रही रात भर॥ ठंड लगने लगी जब बदन […]

कहानी

“यादों के झरोखों से”

“यादों के झरोखों से” समय आकर निकल जाता है और हम नए कलेवर में प्रतिदिन न जाने कितने रंगों मे खुद को रंगा हुआ पाते हैं, किसने रंगा, कब रंगा और क्यों रंगा यह तो तब पता चलता है जब या तो आईना हमारे पास आता है या हम खुद आईने के पास जाते हैं। […]

कविता

” चौपाई, श्रृंगार रस”

मुरली हाथ गले मह माला, पितांबर सोहे गोपाला मोर पंख मुकुट नंदलाला, चैन चुरा जाए बृजबाला।।-1 मातु यशोमति भवन अटारी, हर्षित हृदय सुखी महतारी गोकुल की सब गैया न्यारी, ग्वाल बाल सब हुए सुखारी।।-2 लखि राधे की नरम कलाई, चुड़िया बेचन चले कन्हाई बरसाने की गली निराई, तब मुरली ने राग बजाई।।-3 सज धज राधे […]

कविता

ज़िंदगी

एक हसीन तोहफा है जिंदगी। फूल बनकर मुस्कुराना, मुस्कुरा कर गम भुलाना है जिंदगी। माँ का प्यार, यारो की यारी है जिंदगी। हार को जीत मे बदलना या नामुमकिन को मुमकिन मे बदलना है जिंदगी। एक वरदान है जिंदगी, एक अरमान है जिंदगी, उस खुदा का एक अहसान है जिंदगी। – श्रीयांश गुप्ता

गीत/नवगीत

नव वर्ष का भोर

नव वर्ष का भोर आया है नये खग- कल गान लाया है धरा पे मधुर मकरन्द छाया है पुष्पित फूलों ने एक हार बनाया है। नव वर्ष का – – – – – – – – – – – – – – – – – – – – वहक़ रही है सव अन्तर धड़कन झूम […]

मुक्तक/दोहा

नववर्ष पर दोहे

दो हजार सत्रह  चला, छोड सभी का साथ ! हमें थमा कर हाथ में, नये साल का हाथ !! आने को मुस्तैद है , नया नवेला वर्ष ! दिल में सबके प्यार का, दिखे उमड़ता हर्ष !! दो हजार सत्रह चला, खेल कई नव खेल ! हुए बरी कुछ लोग तो, गए भ्रष्ट कुछ जेल […]

कविता बाल कविता

नूतन वर्ष का अभिनंदन

नूतन वर्ष हो मंगलदाता, नूतन वर्ष हो शुभफलदाता, नया वर्ष हो सुख का साधन, नया वर्ष हो हर दुख-भाजन.   आज दुःखों के बंधन तोड़ें, और सुखों से नाता जोड़ें, खुद भी हंसें औरों को हंसाएं, आज न होंगे पथ में रोड़े.   आज नया संकल्प करें हम, साथ चलेंगे हम सब मिलकर, एक साथ […]