बाल गीत: आपके-हमारे

1.ये ले मेरी बर्फी

मैं भी खेलूं तू भी खेले
आओ मिल कर होली
सारी कुट्टी अब्बा कर लें
फिर से कर लें दोस्ती
अपनी गुझिया मुझको दे दी
ये ले मेरी बर्फी
मैं भी खेलूं तू भी खेले
आओ मिल कर होली
सुदर्शन खन्ना
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2.अच्छी दादी!

अच्छी दादी! प्यारी दादी,लादो,’ पिकाचु ‘ पिचकारी,
रंग, गुलाल,गुब्बारे लादो, फ्रेंड्स बुलावे खेलन होली!

पुरण पोळी,गुजिया,पकोड़े संग तुम बनाओ ठंडाई !
मैं जाऊ आँगन में,ओवी संग,गुब्बारों में भरने पानी!

वीरू मामा ढ़ोल बजावे, विनि मामी बजावे मँजीरा !
सोनी चाचू संग रेनडांस करें, बच्चा पार्टी पिटे ढिंढोरा!

लाल, गुलाबी, हरे,नीले रंगीन चेहरों में ढूंढ न पाए मम्मा !
न पढ़ाई की झिकझिक, न डांट पाए हमें तम्बी की अम्मा!

अच्छी दादी! प्यारी दादी ! लव यू दादी ! मत करना मना !
बड़ा हो कर, गुल्लक तोड़, चूका दूंगा मैं हिसाब पुराना !
कुसुम सुराणा
ब्लॉग
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विश्व गौरैया दिवस 20 मार्च पर एक बाल गीत
3.गौरैया की व्यथा

चूं-चूं करती चौबारे पर,
एक गौरैया आई,
मुझको बड़ी बहिन समझ उसने मुझे,
अपनी व्यथा सुनाई.
खेतों में विष भरा हुआ है,
ज़हरीले हैं ताल-तलैया,
दाना-दुनका खाने वाली,
कैसे बचे यहां गौरैया?
अन्न उगाने के लालच में,
ज़हर भरी वे खाद लगाते,
खाकर जहरीले भोजन को,
रोगों को हम पास बुलाते,
घटती जाती हैं दुनिया में,
अपनी ये प्यारी गौरैया,
दाना-दुनका खाने वाली,
कैसे बचे यहाँ गौरैया?
लीला तिवानी

4.मोर

रंग-बिरंगा पक्षी मोर,
सिर पर धारे सुंदर ताज,
पंखों पर प्यारे चंदोवे,
भारत को है इस पर नाज़.
खाता है यह कीड़े-मकोड़े,
कें-कें-कें-कें करता है,
जब छाएं अम्बर पर बादल,
नाच-नाच मन हरता है.
लीला तिवानी

5.चौराहे की बत्तियां

‘ठहरो’ कहती बत्ती लाल,
कर लो थोड़ा-सा आराम,
पीली कहती ‘हो तैयार’
कर लो अपने को होशियार.
हरी घास-सी बत्ती कहती,
‘अब चल दो और पहुंचो पार,
चलना प्यारो संभल-संभलकर,
टकरें ना वाहन दो-चार.

लीला तिवानी

ब्लॉग
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विश्व गौरैया दिवस पर लीला तिवानी के कुछ ब्लॉग्स
गौरैया का इशारा
https://readerblogs.navbharattimes.indiatimes.com/rasleela/%E0%A4%97%E0%A5%8C%E0%A4%B0%E0%A5%88%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%87%E0%A4%B6%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE/

गौरैया की रामकहानी
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सिडनी की सहेली
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परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।