गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

ठोकरें खा के संभलना सीखा |
वक्त के संग में ढलना सीखा |

अब नहीं डर मुझे जमाने से –
संग जमाने के बदलना सीखा |

रोक पाये ना जमाना हम को –
हमने काँटो में है चलना सीखा |

अब अंधेरों से नही डर लगता –
जुगनुओं जैसे चमकना सीखा |

हूँ’मृदुल ‘मैं मगर कमज़ोर नहीं-
आग बन हमने दहकना सीखा |

©मंजूषा श्रीवास्तव ‘मृदुल ‘
लखनऊ ,उत्तरप्रदेश

*मंजूषा श्रीवास्तव

शिक्षा : एम. ए (हिन्दी) बी .एड पति : श्री लवलेश कुमार श्रीवास्तव साहित्यिक उपलब्धि : उड़ान (साझा संग्रह), संदल सुगंध (साझा काव्य संग्रह ), गज़ल गंगा (साझा संग्रह ) रेवान्त (त्रैमासिक पत्रिका) नवभारत टाइम्स , स्वतंत्र भारत , नवजीवन इत्यादि समाचार पत्रों में रचनाओं प्रकाशित पता : 12/75 इंदिरा नगर , लखनऊ (यू. पी ) पिन कोड - 226016