Author :

  • दौड़ रही है जिन्दगी

    दौड़ रही है जिन्दगी

    दौड़ रही है जिन्दगी रोटी की जद्दोजहद में। कुछ निस्तेज चेहरे बस सड़कों पर दौड़ने का उद्देश्य लिये । तो कुछ चमकीले चेहरे बन पतगें सैर करते है खुले आसमान में न कोई बन्धन न चिन्ता...

  • अबोला

    अबोला

    पिछले कितने ही दिनों से छोटी मोटी नोक झोक चल रही थी अब बातें मन को चुभने सी लगी थी दो दिन से तो अबोला ही था पर मन में कुछ खटक भी रहा था पर...

  • खोज रही थी

    खोज रही थी

    एक रोज खोज रही थी खुद को पाया कभी तुम्हारे कान्धें की नीचे तुम्हारे सर को दिये सराहा तो कभी पाया खुद को खुंटी की जगह जहाँ उतार दिया करते हो तुम उलझनें अपनी शर्ट के...

  • यादों का बसेरा

    यादों का बसेरा

    सर्दियों की शाम खिड़की के पास बैठकर काफी पीना उसका पंसदिदा शौक था, हमेशा वह इसी तरह बाहर के नजारे देखा करती । पार्क मे खेलते बच्चे ,चिडि़यों का चहचहा कर नीड़ की तरफ लौटने का...

  • पी रही हूँ

    पी रही हूँ

    पी ही हूँ गरल की तरह कर आत्मा का हनन बरस रहा है आज फिर आसमां से पानी में मिला वो निकल चिमनियों के मुख से मिल गया प्राणदायनी के साथ जो पी रही हूँ आज...

  • सिलवटें

    सिलवटें

    पड़ रही है मन पर उम्र की सिलवटें मैं चाह कर भी नवयौवना सी सज नहीं पाती मन के किसी कोने में ये अधुरापन हावी रहता है चालिस बसन्त के बाद तन और मन की स्थिति...

  • अन्जाना भय

    अन्जाना भय

    रोज मरती है ख्वाहिशें अल्हड़ नादान बचपन की एक अजीब सा डर पीछा करती कुछ निगाहें अनहोनी का भय सहम जाती हूँ आती नहीं तुम जब तक आंशकिंत रहती है ममता की छांव भी हर बार...

  • राजकुमारी

    राजकुमारी

    घर की रौनक को दोनों बच्चों ने अपनी खिलखिलाहट से चार चाँद लगा दिये थे पर नन्हीं सी रिया के जन्म लेने से लेकर थोड़ी बडी़ होने तक कुछ लोगों को खटकती भी थी “माँ देखो...

  • प्यार की बून्दें

    प्यार की बून्दें

    तन्हा होती हूँ जब अपने आप से बातें करती हूँ कभी सोचती हूँ कि तुम न होते तो… कोने में टेबल पर रखा तुम्हारा दिया लाल गुलाब अब सूखने को है देकर अपने अहसास मुझे, टपकी...

  • साया

    साया

    पिछले कितने ही समय से तान्या की उदासी विपिन से देखी ही नहीं जा रही थी पिता को खोने के सदमें के कारण वो अपने आपको भी दर्द में डूबा चुकी थी कई बार विपिन ने...