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  • विकलांग मानसिकता

    विकलांग मानसिकता

    ” पैदा हुआ तब कितना रोये थे तुम इसकी विकलांगता को देख कर …” मां आज बहुत कुछ कहना चाहती थी पर रूक गई। ” हाँ शायद तुम ठीक ही कहती थी शारीरिक विकलांगता की कमी...

  • एहसास  जुड़े

    एहसास जुड़े

    आज नये कुछ अहसास मन के किसी कोने में खुद के होने का अहसास खोया हुआ था कहीं आज हुआ ये अहसास कि खुद को होना ये अहसास कि मैं जी लूं कुछ पल अपने लिए...

  • ये चालिस का दौर है

    ये चालिस का दौर है

    उम्र हम पर हावी नहीं हो सकती क्योंकि ये चालिस का दौर है बालों की हल्की सफैदी छिपा लेगें कानों के पीछे ही हर शौक को जिन्दा रखेंगे हर मात को दगा देगें जिन्दगी की शतरंज...


  • मुझे नींद क्यों नहीं आती।

    मुझे नींद क्यों नहीं आती।

    मुझे नींद क्यों नहीं आती। अक्सर देर रात तक थिरकती है अंगुलियाँ मोबाईल की दुनिया में उचट जाती है फिर नींद आंखों से कहीं दूर सोचती हूँ फिर मुझे नींद क्यों नहीं आती। जहाँ मेरे शब्द...

  • आगो़श में

    आगो़श में

    आगो़श में ********* आ सुस्ता लें जिन्दगी के सफर से चुरा कर कुछ पल अहसास जी लें कुछ सपने तेरे कुछ मेरे बनके रह जाती हूँ बुत सी तेरी बांहों में आकर ठहर जाये ये सांसों...

  • दौड़ रही है जिन्दगी

    दौड़ रही है जिन्दगी

    दौड़ रही है जिन्दगी रोटी की जद्दोजहद में। कुछ निस्तेज चेहरे बस सड़कों पर दौड़ने का उद्देश्य लिये । तो कुछ चमकीले चेहरे बन पतगें सैर करते है खुले आसमान में न कोई बन्धन न चिन्ता...

  • अबोला

    अबोला

    पिछले कितने ही दिनों से छोटी मोटी नोक झोक चल रही थी अब बातें मन को चुभने सी लगी थी दो दिन से तो अबोला ही था पर मन में कुछ खटक भी रहा था पर...

  • खोज रही थी

    खोज रही थी

    एक रोज खोज रही थी खुद को पाया कभी तुम्हारे कान्धें की नीचे तुम्हारे सर को दिये सराहा तो कभी पाया खुद को खुंटी की जगह जहाँ उतार दिया करते हो तुम उलझनें अपनी शर्ट के...

  • यादों का बसेरा

    यादों का बसेरा

    सर्दियों की शाम खिड़की के पास बैठकर काफी पीना उसका पंसदिदा शौक था, हमेशा वह इसी तरह बाहर के नजारे देखा करती । पार्क मे खेलते बच्चे ,चिडि़यों का चहचहा कर नीड़ की तरफ लौटने का...