सामाजिक

आभासी दुनियाँ और युवा

बदलते दौर में सबसे क्रांतिकारी परिवर्तन जो हुआ है वो है सोशल मिडिया में हर उम्र के लोगों की दिलचस्पी ।आज हर आदमी अपने पसन्द अनुसार व्हाटसप ,फेसबुक ,ट्वीटर पर किसी न किसी से जुडा़ है भले ही ये जुडा़व आभासी है पर तन व मन को स्वस्थ रखने में ये योगदान बहुत मायने रखता […]

कविता

हास्य गलतफहमियाँ

बदल गये चेहरे लोगों के बढ़ती गई गलतफहमियाँ लड़के की चाल मतवाली कानों में पहने बालियाँ लडकियों ने लगाई बुलेट पर धाक बन रही है नई बातें शक्लें धोखा खा जायेगी नजरिये से न पहचान पायेंगे । ऐसे ही इक दिन सड़क पर दनदनाती बुलेट पर लड़की निकली आगे हम रहे हक्के बक्के से आगे […]

कविता

ऐ जिन्दगी बता

रेत पर लिखी इबारतों जैसी तेरी बातें उड़ जाती है हल्की सी हवा के ऐ जिन्दगी बता तेरा वजूद क्या है । कागज़ पर स्याही से रची कविता सी तू मिट जाती है वक्त के साथ ऐ जिन्दगी बता तेरा वजूद क्या है । तपती धूप में जलती रेत सी बादलों के स्नेह से नहा […]

लघुकथा

अनकहा भय

“हा हा अब वक्त है मेरा , बदला लूंगी देखना ।कैसे मुझे अधजली हालत में नाली में फैंक देते थे ।” सिगरेट मनुष्य पर हावी थी आज । “ओह छोड़ दो ,छोड़ दो मुझे ,जल रहा हूँ छोड़ दो ।” “हाँ वैसे भी जले हुये को क्या जलाना ,तुम्हारे फेफडे़ तो पहले ही मेरे धुएं […]

कविता

बचपन तू बहुत याद आता है

सच में बचपन तू बहुत याद आता है भूलने की कोशिशें बहुत की मगर तू बडा़ तड़पाता है वो विशेष बन ठन्डे पानी का अहसास पावों को आज भी गुदगुदाता है ऐ बचपन तू रोज याद आता है वो हलवे का स्वाद चनें की सब्जी का स्वाद आज भी मन को ललचाता है ऐ बचपन […]

कविता

दर्द दे गया

दर्द दे गया जिन्दगी में वो इस कदर अब तो बस इस दिल में वीरानगी रह गई। तेरी बेवफाई के गम के इतने सताये हुये है कि सारी खुशियाँ धरी की धरी रह गई। बेबस किया है तेरी जुदाई ने इतना मेरी आंखों की पोरों पर बस नमी रह गई। लौटकर आने की जुस्तजु लिये […]

लघुकथा

विकलांग मानसिकता

” पैदा हुआ तब कितना रोये थे तुम इसकी विकलांगता को देख कर …” मां आज बहुत कुछ कहना चाहती थी पर रूक गई। ” हाँ शायद तुम ठीक ही कहती थी शारीरिक विकलांगता की कमी इंसान दिमाग से पूरी कर सकता है पर मानसिक विकलांगता को दूर करने में मुझे कई साल लग गये […]

कविता

एहसास जुड़े

आज नये कुछ अहसास मन के किसी कोने में खुद के होने का अहसास खोया हुआ था कहीं आज हुआ ये अहसास कि खुद को होना ये अहसास कि मैं जी लूं कुछ पल अपने लिए भी । आज फिर जताया किसी ने बेशर्म हूँ मैं जो मार कर खुद का स्वाभिमान जीती हूँ दूसरों […]

कविता

ये चालिस का दौर है

उम्र हम पर हावी नहीं हो सकती क्योंकि ये चालिस का दौर है बालों की हल्की सफैदी छिपा लेगें कानों के पीछे ही हर शौक को जिन्दा रखेंगे हर मात को दगा देगें जिन्दगी की शतरंज की बिसात पर । ये चालिस का दौर है खुमारी है नयी नयी दादी ,नानी बनने की चाह भी […]

कविता

खुद लड़ना सीख लिया है मैंने

खुद लड़ना सीख लिया है ********************* खुद लड़ना सीख लिया है तेरी ओट से निकलकर तनाव मन पर भारी है मगर खुद से नाता जोड़ लिया है मैने उम्मीदों और आशाओं से नाता तौड़ लिया है खुद लड़ना सीख लिया है बहुत कोशिशें की झेल पाऊं अपने अपनों के वार अब उठा मन में ,लकडी़ […]