गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका

धुआँ -ए- पराली पिए जा रहा हूँ। हूँ इन्सां,पशु – सा जिये जा रहा हूँ।। न डर है किसी को तबाही का अपनी, इसी ग़म का बोझा लिए जा रहा हूँ। मुझे देश के दुश्मनों से घृणा है, मगर कर्म अपना किए जा रहा हूँ। है कितना दुखी अन्नदाता बेचारा, यही सोच है पर जिए […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

बेसुरे गीत इंसान गाने लगा। आदमी आदमी को खाने लगा।। दौलत के लिए अंधा बहरा बना, नीति को टाँग धन कमाने लगा। हवस का हर पुजारी दरिंदा हुआ, नारियों को दनुज -सा सताने लगा। किसका विश्वास क्यों अब करे आदमी, बेटियों का जिस्म उसको भाने लगा। धर्म , नीतियाँ रो रहीं, खो रहीं, न्याय का […]

बाल कविता

बालगीत – चींटी 🐜🐜

चींटी जब पथ पर बढ़ती है। ऊँचे पर्वत पर चढ़ती है।। चढ़ती फिर नीचे गिर जाती। गिर गिर कर मंजिल को पाती जब चींटी जिद पर अड़ती है। ऊँचे पर्वत पर चढ़ती है।। थकती नहीं हारती चींटी। मन को नहीं मारती चींटी।। नए नित्य सपने गढ़ती है। ऊँचे पर्वत पर चढ़ती है।। जज़्बा ,जोश, जुनूँ […]

गीत/नवगीत

गीत – छलिया आदमी

आदमी ही आदमी को छल रहा है। आदमी से आदमी क्यों जल रहा है।। मान – मर्यादा हुई तार – तार इतनी! टूटी सरहद मान की लगातार कितनी?? आदमी को आदमी क्यों खल रहा है। आदमी ही आदमी को छल रहा है।। सड़क पर नारी की इज्जत जा रही। हैवानियत पागल खड़ी मुस्का रही।। भावी […]

कुण्डली/छंद

कुण्डलिया – नारी क्यारी बाग की

(1) कितना वहशी हो गया , देखो रे इंसान। लाज – हया धो पी गया , दिखती कोरी शान।। दिखती कोरी शान, न समझे बहना माता। क्यों दी मानव – देह , बता दे अरे विधाता!! श्वान सुअर – सा काम, भरा मानव – तन इतना। पामर पापी क्लीव , हुआ तू वहशी कितना?? (2) […]

बाल कविता

बाल गीत – बच्चे वही सफलता पाते

सही समय विद्यालय जाते। बच्चे वही सफलता पाते।। जल्दी जगना जल्दी सोना। स्वस्थ देह दिमाग भी होना।। गुरु जी हमें नित्य समझाते। बच्चे वही सफलता पाते।। करते मात -पिता का आदर। शीश झुकाते गुरु को सादर।। स्नेह , मान दुनिया में पाते। बच्चे वही सफलता पाते।। समय न करते जो बरवाद। उन्हें समय करता आबाद।। […]

हास्य व्यंग्य

व्यंग्य – मैं …. शपथ लेता हूँ कि

बात -बात में शपथ लेने की बात करना कुछ लोगों का स्वभाव होता है। अपनी सौगंध , आपकी सौगंध, गंगा की सौगंध , भगवान की सौगंध और न जाने कितने प्रकार की रंगबिरंगी सौगंध(शपथ) देखने -सुनने को प्रायः मिल ही जाती है। कुछ लोगों का तो सौगंध खाना या लेना एक स्थाई तकिया कलाम ही […]

गीत/नवगीत

जीवन का संगीत

जो मेरा मनमीत बन गया। जीवन का संगीत बन गया।। जीवन की राहें रपटीली। उबड़ – खाबड़ और कँटीली।। हर पल-पल संग्राम ठन गया। जीवन का संगीत बन गया।। अपना जैसा सबको माना। हृदय दे दिया अपना जाना।। आस्तीन का साँप बन गया। जीवन का संगीत बन गया।। मैंने फूल महकते देखे। पंछी बाग चहकते […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

मैं कहाँ से था चला कहाँ आ गया। तूफ़ान से रास्ता मेरा टकरा गया। टुकड़े – टुकड़े जी रहा था ज़िन्दगी वक़्ते – आख़िर में ज़माना भा गया। रोज सूरज कर रहा है रौशनी, ज़िंदगी में क्यों अँधेरा छा गया। बेमुरब्बत है फ़रिश्ता मौत का, जाने कितने आसमां वो खा गया। मैंने समझा था जिसे […]

बाल कविता

बाल गीत – कुकड़ कूँ गाता

सुबह हुई तो बाँग लगाता। मुर्गा गीत कुकड़ कूँ गाता।। कहता हमसे जागो प्यारे। आलस छोड़ो सुबह सकारे।। अपने साथ मुर्गियाँ लाता। मुर्गा गीत कुकड़ कूँ गाता।। कलगी लाल शीश पर डोले। मस्त चाल चलकर नित बोले। उसका गाना हमें सुहाता। मुर्गा गीत कुकड़ कूँ गाता।। मुर्गी कहती ‘क्यों उठ जाते । इतनी जल्दी हमें […]