गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

उसकी तरक्की तो गई टल जिसने सोचा करेंगे कल =================== मुश्किल से डरना कैसा कोशिश कर निकलेगा हल =================== दिल में जब रंजिश नहीं कोई फिर माथे पर क्यों हैं बल =================== लंबी-लंबी बातें छोड़ मेहनत कर पाएगा फल =================== कोई साथ नहीं देगा अपनी आग में आप ही जल =================== गम को ढाल के […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

साथ अपने तू यहां से और क्या ले जाएगा दूसरों से जो मिली होगी दुआ ले जाएगा ============================= अपनी हस्ती पे न कर इतना गुरूर बेवजह वक्त तिनके की तरह तुझको उड़ा ले जाएगा ============================= किसी आँख में तेरी वजह से आया जो आँसू कोई साथ अपने तेरी सब नेकी बहा ले जाएगा ============================= मारा […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

भरोसा था तुझे पहले रहा वो अब नहीं शायद, तेरी उम्मीद पर मैं ही खरा उतरा नहीं शायद, तेरे एहसास की गर्मी में तो कोई कमी ना थी, पर मैं ही था पत्थरदिल तभी पिघला नहीं शायद, दीवानों की तरह तुमने मुझे बेइंतिहा चाहा, तुम्हारा प्यार लेकिन मैं कभी समझा नहीं शायद, दुनिया से तो […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

कभी ना लौटा वो गुज़रे हुए लम्हे की तरह मैं था जिसके लिए मंज़िल के रास्ते की तरह जो दिल में है उसे ज़ुबान पे न लाया करो तन्हा रह जाओगे वरना तुम आइने की तरह मुश्किलें तो बहुत सी आईं मेरी राह में भी पर मैं टूटा नहीं तुम्हारे हौसले की तरह उतर के […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

न जाने किस मिजाज़ का सारा जहान हो गया ईमानदार आदमी भी बेईमान हो गया तहजीब और ज़मीर जिनके कर गए हिजरत कहीं जिस्म उन हजरात का खाली मकान हो गया ये देख कर हैरान हूँ कि वक्त क्या पलटा मेरा कल जो चापलूस था वो बदज़ुबान हो गया मालामाल कर दिया मुझे दे के […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

ये बात दीगर है कि चारागर को खुद ही पता न हो कोई दर्द ऐसा बना नहीं जिसकी जहां में दवा न हो चाहता हूँ मैं इश्क़ में आए मेरे ऐसा मुकाम तू चाहे जितने कर सितम मुझे तुझसे कोई गिला न हो दुश्मन भी होते हैं ज़रूरी दोस्तों के साथ-साथ वहां कैसे शमा जलाऊँ […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

बच जाओगे इक बार तुम शायद सलीब से लेकिन बचा नहीं कोई अपने नसीब से हम जिसके इंतज़ार में घंटों खड़े रहे देखा भी नहीं उसने जब निकला करीब से लफ्ज़ मेरे सीने में घुट-घुट के मर गए करते रहे वो गुफ्तगू मेरे रकीब से जिस नाम से शुरू हुए उसी नाम पर खतम होते […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

आगे क्या होगा ये अक्सर सोचता रहता हूँ मैं सोच कर फिर बेवजह ही खौलता रहता हूँ मैं लफ़्ज़ों की लौ से गरम रखता हूँ मैं रिश्ते सभी और वो कहते हैं हरदम बोलता रहता हूँ मैं आँखों में, बातों में, शेरों में, अदाओं में तेरी तुझमें ही खुद को मुसलसल ढूंढता रहता हूँ मैं […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

लकीरें हाथ की सारी मिटा दो आगाही की किताबें सब जला दो चाहें तो नहीं कुछ भी नामुमकिन चलो उठो ये दुनिया को दिखा दो बीमार-ए-इश्क़ हूँ मुझको कोई भी दवा न रास आए बस दुआ दो ताब सह पाएगा न मोम का दिल रुख-ए-रोशन को पर्दे में छुपा दो राख कर देंगे ये सारे […]

गीतिका/ग़ज़ल

गज़ल

चढ़ान ही नहीं फकत उतार भी है ज़िंदगी साया-ए-दीवार भी है, दार भी है ज़िंदगी मुतमईन भी हूँ, चाहतें भी ज़िंदा हैं कई करार भी है, थोड़ी बेकरार भी है ज़िंदगी छोड़ कर अधूरी मुलाकात चल दिए थे जो उनके लौटने का इंतज़ार भी है ज़िंदगी ज़रूरतों और ख्वाहिशों के दरमियान डोलती कभी है प्यार […]