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  • गज़ल

    गज़ल

    कोई मतला, कोई मक्ता नहीं लिक्खा मैंने हुई मुद्दत नाम तेरा नहीं लिक्खा मैंने ========================== चाहता तो तुझे बदनाम भी कर सकता था पर कातिल तुझे अपना नहीं लिक्खा मैंने ========================== बहा के अश्क बेशुमार कोरे...

  • गज़ल

    गज़ल

    मैंने हाल-ए-दिल जब भी उसे सच-सच सुनाया है मेरी तकलीफ पर ज़ालिम हमेशा मुस्कुराया है याद आ गए एक पल में मुझे सारे गुनाह अपने किसी मय्यत का जब कंधों पे मैंने बोझ उठाया है दिखाएँ...

  • गज़ल

    गज़ल

    हर तरफ बस तू ही तू हो जा उठा नकाब, रूबरू हो जा या किसी की आरज़ू कर ले या किसी की आरज़ू हो जा मुहीत-ए-बेकरां से मिलना है मिटा खुद को आबजू हो जा अब...

  • गज़ल

    गज़ल

    सोचता हूँ कि महफिलों से किनारा कर लूँ यादों को ही तनहाई का सहारा कर लूँ मैंने चाहा है अपनी जान से भी ज्यादा जिसे अब उसे गैर के साथ कैसे गवारा कर लूँ तू मेरा...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    मेरी कहानी को कोई अंजाम मिल न पाया तूने भेजा था जो मुझको वो पैगाम मिल न पाया मिला तो बहुत कुछ है लेकिन ये लग रहा है हकदार था मैं जिसका वो ईनाम मिल न...

  • गज़ल

    गज़ल

    तो क्या हुआ कि अब न तेरे खास रहे हैं किसी वक्त तेरी आँखों की हम प्यास रहे हैं इक बार जो गुनाह-ए-इशक कर लिया हमने सारी उम्र ही फिर हम बद-हवास रहे हैं तेरी हँसी...

  • गज़ल

    गज़ल

    छोटा सा इक आशियां चाहते हैं ज़रूरत से ज्यादा कहां चाहते हैं खिज़ाओं का मौसम रहे दूर जिससे उम्मीदों का वो गुलसितां चाहते हैं हक का ही लेंगे हो ज्यादा या थोड़ा न सर पे कोई...

  • गज़ल

    गज़ल

    न जाने आज क्यों हूँ अश्कबार थोड़ा-सा भरा हुआ है सीने में गुबार थोड़ा-सा घुल गया ये कौन सा ज़हर हवाओं में हर शख्स इस शहर का है बीमार थोड़ा-सा मेरी वजह से सिर्फ ये रिश्ता...

  • गज़ल

    गज़ल

    हो जाता जो मुझे तेरा दीदार थोड़ा-सा आ जाता मेरे दिल को भी करार थोड़ा-सा लज़्ज़त-ए-इश्क और बढ़ाने के लिए था इंकार थोड़ा-सा कभी इकरार थोड़ा-सा लगता है वक्त दुआओं को कुबूल होने में कर सके...

  • गज़ल

    गज़ल

    सच की तल्खी भले ज़ुबान में रख नज़ाकत मौके की भी ध्यान में रख मसले बातों से भी हल होते हैं अभी शमशीर अपनी म्यान में रख ऊँगली औरों पे उठाना पीछे पहले खुद को तू...