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  • गज़ल

    गज़ल

    ना चाँद सजाया माथे पर ना दामन भरा सितारों से जज़्बा-ए-इश्क लिए दिल में हम खेले हैं अंगारों से ============================== रंग भरे हैं तस्वीरों में गम के भी, खुशी के भी जागी हुई उम्मीदों से कभी...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    लेकर तेरी यादों से इज़ाज़त कभी-कभी, कर लेता है ये दिल भी इबादत कभी-कभी मिटा के अपनी हस्ती को कतरा हुआ दरिया तकलीफ भी बन जाती है राहत कभी-कभी वैसे तो बदलना बहुत मुश्किल है किसी...

  • गज़ल

    गज़ल

    जिसकी मौत पर अफसोस कायनात करे वो शख्स फिर किसलिए गम-ए-हयात करे जीते जी यहां कुछ ऐसे काम कर जाओ कि तुम्हारे बाद भी कोई तुम्हारी बात करे मेरे मालिक के लिए कुछ भी नहीं नामुमकिन...

  • लेख

    लेख

    मानव के भीतर अपार क्षमता है। मुश्किल यही है कि हम अपनी क्षमताओं से अनभिज्ञ हैं। हमें ज्ञात ही नहीं कि हम क्या कर सकते हैं। हम सब पूरे जीवन में अपनी क्षमता का एक क्षुद्र...

  • गज़ल

    गज़ल

    बिखर के बीज की तरह चमन के काम आए मिल के खाक में अपने वतन के काम आए ============================ रात भर जलते रहे चाहे चिरागों की तरह हमें खुशी है कुछ तो अंजुमन के काम आए...

  • गज़ल

    गज़ल

    बात से बात चले तो ये स्याह रात कटे चाँद कुछ और ढले तो ये स्याह रात कटे सोए हुए सूरज से माँग करके थोड़ा सा उजाला मुँह पे मले तो ये स्याह रात कटे सीने...

  • लेख

    लेख

    सीखना एक जीवन भर चलने वाली प्रक्रिया है। हम इस संसार में एक कोरे कागज़ की भाँति आते हैं। पहले ही दिन से हम सीखना प्रारंभ कर देते हैं जो हमारे अंतिम दिन तक चलता रहता...

  • गज़ल

    गज़ल

    बुजुर्गों की तेरे हाथों से ना तौहीन हो जाए तेरी बातों से कोई दोस्त ना गमगीन हो जाए मिल जाए अगर इसमें किसी मज़लूम का आँसू घड़ी में दरिया मीठे पानी का नमकीन हो जाए उदासी...

  • गज़ल

    गज़ल

    दिलफरेब सी ये शाम-ओ-सहर फिर मिले ना मिले तेरी नज़रों से मेरी दीदा-ए-तर फिर मिले ना मिले आए ही गए हो तो कुछ देर बैठो, बात करो तंग गलियों में मेरा छोटा सा घर फिर मिले...

  • गज़ल

    गज़ल

    कभी हम फूल होते हैं, कभी हम खार होते हैं कभी लाठी बुढ़ापे की, कभी तलवार होते हैं आईने की तरह सच बोलते हैं हम हमेशा ही जो जैसे देखता है वैसे ही दीदार होते हैं...