गीतिका/ग़ज़ल

गज़ल

न जाने आज क्यों हूँ अश्कबार थोड़ा-सा भरा हुआ है सीने में गुबार थोड़ा-सा ========================== घुल गया ये कौन सा ज़हर हवाओं में हर शख्स इस शहर का है बीमार थोड़ा-सा ========================== मेरी वजह से सिर्फ ये रिश्ता नहीं टूटा तू भी तो है इसका जिम्मेदार थोड़ा-सा ========================== ज़िंदगी होती है उसकी ज्यादा ही मुश्किल […]

गीतिका/ग़ज़ल

गज़ल

दो दिन सुकून से जीना मुहाल करते हैं ये दुनिया वाले भी कितने सवाल करते हैं ========================== न रह सकेंगे खुश वो लोग किसी कीमत पर जो दूसरे की खुशी पर मलाल करते हैं ========================== हम बेकार हैं तो भी कुछ कम मसरूफ नहीं जो लोग कुछ नहीं करते कमाल करते हैं ========================== हवा देने […]

गीतिका/ग़ज़ल

गज़ल

सुकून-ओ-चैन क्या पता किधर चले गए, अपनों की दुआओं से भी असर चले गए खुद फरिश्तों को भी नाज़ होता था जिन पे, कौन सी दुनिया में वो बशर चले गए, सड़क के बीचों-बीच मैं तड़पता ही रहा सारे लोग अपने – अपने घर चले गए कहते थे जो कि साथ निभाएंगे उम्र भर, इधर […]

गीतिका/ग़ज़ल

गज़ल

इस दौर-ए-परेशानी में राहत ले के आया हूँ नफरत के शहर में मैं मुहब्बत ले के आया हूँ हैं तेरे चाहने वाले हज़ारों है खबर लेकिन तुझे अपना बनाने की मैं हसरत ले के आया हूँ धोने के लिए अपने पुराने सब गुनाहों को मैं आँखों में दरिया-ए-नदामत ले के आया हूँ मुड़ मुड़ के […]

गीतिका/ग़ज़ल

गज़ल

हंसता हूँ तो आँखों में नमी महसूस होती है न जाने दिल को क्यों तेरी कमी महसूस होती है सुनाओ मत महफिल में तुम अपने दर्द के किस्से किसी के गम से लोगों को खुशी महसूस होती है नहीं है तू कहीं मेरे खयालों के सिवा हमदम फिर क्यों हर तरफ तू हर घड़ी महसूस […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

ए खुशी तुझे ता – उम्र तलाशा है बहुत नहीं नसीब में तू पर तुझे चाहा है बहुत ये मिट्टी यूँ ही नहीं नम है इस वीराने की सालों पहले यहां शायद कोई रोया है बहुत चलूँ किस सिम्त कोई राह नज़र नहीं आती चिराग दिल का जलाओ कि अँधेरा है बहुत साथ खुद्दारी के […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

जाने वाले लौट आ कि तबियत उदास है कोई गीत गुनगुना कि तबियत उदास है ========================== काटने को दौड़ते हैं ये रेशमी बिस्तर बाहों में ले सुला कि तबियत उदास है ========================== दम ना निकल जाए मेरा प्यास से साकी इक जाम तू पिला कि तबियत उदास है ========================== अक्स भी दिखता नहीं अँधेरे में […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

ज़ख्म अपने दिल पे बेशुमार खा गया, मैं आदमी पहचानने में मार खा गया, चला था भरोसे का कारोबार करने मैं, जिसपे किया भरोसा कारोबार खा गया, बच्चे मेरे इक शाम को तरसते ही रहे, दफ्तर मेरा सारे मेरे इतवार खा गया, नींद नहीं आती मुझको रात-रात भर, बेटी का कद सारा मेरा करार खा […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

छलनी यारों के करम से है सीना अपना पहरेदारों ने ही लूटा है दफीना अपना धोखेबाज़ निकले जिनकी खातिर हमने एक कर दिया था खून-पसीना अपना आगे बढ़ने देता है न डुबोता है हमें ये किस गर्दाब में फंसा है सफीना अपना जवाब देने से पहले ये सोच लेना तू तेरी हाँ-ना पे टिका है […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

लबों पे लेकर निकले हैं इंकलाब का नारा लोग, बदलेंगे तस्वीर वतन की हम जैसे आवारा लोग, ऐसी आँधी आएगी ज़ालिम तू भी बच ना पाएगा, सीना तान कर खड़े हुए हैं बेघर बेसहारा लोग, कर लीं जितनी करनी थी फरियादें गूँगे बहरों से, अब ना दोहराएंगे ऐसी गलती कोई दोबारा लोग, कशकोल नहीं शमशीरें […]