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  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    होनी थी जितनी बारिश-ए-इकराम हो चुकी अब आओ घर को लौट चलें शाम हो चुकी किस्सा-ए-गम अपना उनको जब लगा कहने बोले वो ये खबर तो कब की आम हो चुकी पहने हुए थी शर्म का...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    जिसके ज़ख्म पे मैंने सदा मरहम लगाया है, मेरी पीठ पर उस शख्स ने खंजर चलाया है करो तवाफ-ए-काबा या लगाओ गंगा में डुबकी, ना होगा कुछ अगर तूने किसी का दिल दुखाया है वक्त के...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    हम-तुम जब महफिल में अचानक आमने-सामने आए थे मैं भी डर गया था थोड़ा-सा, तुम भी कुछ घबराए थे समझने वाले समझ गए कि कुछ तो पर्दादारी है जब तुम सबसे गले मिले और हमसे नैन...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    जो मेरे दिल के बेहद पास था वो महबूब मेरा बिछड़ गया इस आम सी दुनिया में खास था वो महबूब मेरा बिछड़ गया अब डूब कर इस जाम में भी तिश्नगी मिटती नहीं मेरी रूह...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    मौसम जैसे बदल गए जो उन इंसानों का गम क्या अपने ही जब रहे न अपने तो बेगानों का गम क्या नेकियाँ मेरी भूल गए हैं वो तो कोई बात नहीं जो दरिया में डाल दिए...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    बहुत जी चुका हूँ अब मुझे मर जाने दे खुशबू की तरह हवा में बिखर जाने दे सिवा रेत के कुछ भी न मिला साहिल पे अब कश्ती को समंदर में उतर जाने दे मेरे बारे...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    किसी से सारी उम्र का इकरार न माँगो कुछ भी माँग लो यहाँ बस प्यार न माँगो छूट जाएँ राह में अपने सभी पीछे खुदा से इतनी ज्यादा भी रफ्तार न माँगो इंसाफ पर उसके अगर...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    नम आंखों से भी तुम्हारी खातिर हम मुस्काए थे सीने पर तमगों के जैसे हमने ज़ख्म सजाए थे यारों को तो होना ही था मेरे मरने का अफसोस वो भी छुप-छुपके रोए जो मुझको दाम में...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    बुराइयां करते फिरते हैं मेरी ज़माने में उनको आता है मज़ा मुझे सताने में ये जो फिर से ताल्लुकात बढ़ाने लगे हो कसर कोई रह गई है क्या दिल दुखाने में मैं दिखावे की दुनिया से...

  • गज़ल

    गज़ल

    पल-पल अपने ज़मीर की निगरानी में रहता हूँ सच्चा हूँ तभी शायद परेशानी में रहता हूँ इस गर्दाब से बाहर निकलने की नहीं कोई राह मैं उसकी आँख में अटके हुए पानी में रहता हूँ आलीशान...