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  • गज़ल

    गज़ल

    किस्मत से न था कोई गिला सालों पहले इश्क न जाने क्यों मुझे हुआ सालों पहले ========================== मुसलसल चोटों ने पत्थर सा बन गया हूँ मैं दर्द मुझको हुआ करता था सालों पहले ========================== मैं मर...

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    गज़ल

    हमसे भी किस्मत ने देखो कैसी बेवफाई की जब प्यार कफ़स से हुआ रूत आ गई रिहाई की ============================== सोते हो अपनी ख्वाबगाह में तुम बड़े सुकून से तुम्हें पता क्या कटती है शब किस तरह...

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    गज़ल

    हरेक दर पे सजदा करने की आदत नहीं मेरी जहाँ दिल माने झुकती है वहाँ पर ही ज़बीं मेरी महफिल छोड़कर तेरी चल तो मैं दिया लेकिन लगता है कि रह गई हैं चीज़ें कुछ वहीं...

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    गज़ल

    शब-ए-हिज्र का किस्सा,दिल-ए-बेज़ार की बात क्यों छेड़ते हो हर दफा ये बेकार की बात ============================ सर से पाँव तक शोले दहकने लगते हैं जब भी सुनता हूँ उस बेवफा दिलदार की बात ============================ सफाई दे के...

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    गज़ल

    ज़मीन के सीने पे दीवारें उठा दी जाएँगी निशानियाँ इखलास की सारी मिटा दी जाएँगी ============================ तवंगरों की बेवजह ज़िद पूरी करने के लिए फिर यहाँ पर खून की नदियां बहा दी जाएँगी ============================ याद रखता...

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    गज़ल

    साँसें धुआँ-धुआँ हैं, सीना ज़ख्म-ज़ख्म है उसपर वो पूछता है कि किस बात का गम है जिस वफा के भरोसे मेरी उम्र कट गई अब जा के ये मालूम हुआ मेरा वहम है फेर लेता है...

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    गज़ल

    बहुत खुश है दुश्मन-ए-जान मेरा लेकर फिर से इम्तिहान मेरा बच गए बस यादों के खंडहर ढह गया इश्क का मकान मेरा बहार तू साथ ले गया अपने हुआ वीरान गुलिस्तान मेरा तू भी औरों के...

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    गज़ल

    छोड़कर अपना मैं और तुम आओ हम बनाते हैं मिला कर सारे सुर कोई नई सरगम बनाते हैं उनकी नफरतों का प्यार से देकर जवाब उनको देखो दुश्मनों को कैसे हम हमदम बनाते हैं रंग कर...

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    गज़ल

    ज़रा सी नज़रे-इनायत सनम इधर कर दो चाहे मुझपे इक एहसान समझकर कर दो तमाम उम्र फिर अँधेरों में मैं जी लूँगा मेरे नाम तुम बस अपनी एक सहर कर दो मिज़ाज़पुर्सी को वो आएं चाहे...

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    गज़ल

    भूलता भी नहीं हमको, हमारा भी नहीं होता बिना उस शख्स के अपना गुज़ारा भी नहीं होता क्यों उसका तसव्वुर ही करते हैं रात-दिन हम दुश्मन-ए-जां किसीको इतना प्यारा भी नहीं होता शब-ए-हिज्राँ में कोई राह...