कविता

न जाने कोई

क्या चलता किस के मन में जान नहीं सकता कोई कौन अपना कौन पराया बातों से पहचान सके नहीं कोई कब प्यार बदल जाए नफरत में जान नहीं सकता कोई कब कोई अनजाना आकर बन जाए मीत कोई किस घड़ी बदल जाए वक़्त नहीं जान सके कोई आकर चला जाएं कोई कब न जाने कोई

कविता

पत्नी

तेरा मिजाज़ भी बरसात सा है पता नहीं कब झमाझम बरस जाए और कब बरस कर निकल जाए कभी आंधी सी चल पड़े कभी मंद पड़ जाएं बहुत मुश्किल है समझना तुझको कब धूप कब छांव हो जाए *

कविता

दुनियां है फ़ानी

मालूम है दुनियां है फानी आनी और जानी फिर भी डरता है यह मन इसीलिए तो कैद है न होता जो यह डर घूम रहा होता आजाद परिंदा बन आजादी पे रोक है दिल में भय है मालूम है दुनियां है फ़ानी दो चार दिन की है ज़िंदगानी

कविता

जिंदगी

जिंदगी जीने के लिए है जी भर इसे जी मोहताज न हो औरो पर अपने सलीके से जी जिंदगानी मेरी शर्तें मेरी फिर क्यों जियुं किसी और की शर्तों पर जियुंगा अपनी ही तरह और अपनी ही शर्तों पर *ब्रजेश*

कविता

बच्चे

बच्चों बच्चों में भेद कैसा बच्चे तो बच्चे हैं मेरे और तेरे बच्चे क्या वो तो भगवान का रूप होते है कुछ नटखट कुछ शांत होते पर होते तो बच्चे हैं फिर  कैसा भेद उनमें मेरा बेटा सुंदर तेरा सुंदर क्यों नहीं अपने को पुचकार दूसरे के लिए दुत्कार नहीं नहीं ये भेदभाव है वो […]

कविता

कविता क्या है

कविता आखिर है क्या खुद के अंदर घुमड़ते भावों का उदगार जो अंकित हो जाते है कागज के पन्नों पे बनकर शब्द जिसमें शामिल होती हैं संवेदनाएं प्यार गुस्सा करुणा दया क्रोध ममता

संस्मरण

मेरे शहर का कैलाश मंदिर, महाशिवरात्रि के पर्व पर

मैं आपको, अपने शहर और अपने मोहल्ले के भव्य शिव मंदिर जो कैलाश मंदिर के नाम से जाना जाता है, से परिचित कराता हूं. जिस मोहल्ले में मेरा बचपन, जवानी और जीवन के पचास बर्ष गुजरे उस मोहल्ले में स्थित है शंकर का यह मंदिर कैलाश मंदिर. इस मंदिर के नाम से ही मेरे इस […]