कविता

अभी जवां हूं मैं

उम्र तो है आंकड़ों का खेल अभी हूं जवां मैं तन से मैं थका नहीं मन से थका नहीं थकना मेरी फितरत नहीं झंझावतों से डरता नहीं रुकना मैं जानता नहीं बहता हुआ झरना हूं धार हूं नदी की बहा ले जाऊंगा हर वो पत्थर जो राह में रोड़ा बनेगा मेरी

कविता

आखिर पिता हूं

मैं पिता हूं अपने बच्चें से प्यार करता हूं वो बड़ा हो गया है अपने भविष्य के लिए शहर से बाहर चला गया है मैं अकेला रह गया हूं उम्र भी अब खिसकने लग गई है कभी उसके बचपन के खिलौने देख खुश होता हूं याद करने लगता हूं पुलिस की उस गाड़ी को जो […]

कविता

मृगतृष्णा

चलो चले उस पार जहां मिलते हैं धरती और आकाश मालूम है मुझको यह एक मृगतृष्णा है धरती और आकाश न कहीं मिले हैं न कभी मिलेंगे हम सब बस अपने अपने सपनों में विचरते हैं कभी हंस लेते कभी रो लेते हंसने रोने का मनों को बहलाने फुसलाने का यह सिलसला योही चला अा […]

लेख

सकारात्मक सोच

जीवन रंज और खुशियों का मिला जुला रूप है. कभी खुशियां है तो कभी गम. जीवन में सावन भी है और पतझड़ भी. यह व्यक्ति पर निर्भर करता है कि वह जीवन को किस रूप में लेता है.सकारात्मक सोच के साथ जीता है या नकारात्मक सोच के साथ. सकारात्मक नजरिया रखने से जीवन कुछ आसान […]

हास्य व्यंग्य

किस्सागोई

आपको आज एक दिलचस्प किस्सा सुनाता हूं. हुआ योंकि एक बार मैं अपनी बहुरिया के साथ शादी के बाद जब वो चंद्रमुखी थी, इलाहाबाद से अपने घर एटा अा रहा था. एटा तक कोई ट्रेन आती नहीं थी अतः टूंडला तक का रिज़र्वेशन था. ट्रेन के द्वारा मैंने यात्राएं नहीं की थी क्योंकि एटा से […]

कविता

दावत

जब नहीं मिला किसी शादी का न्योता मन खीज गया कैसा आया यह करोना लोग हैं मजबूर मजबूरी में अपनी बंधे हुए कायदे नियमों से किस को बुलाए किस को छोड़े हैं बड़े असमंजस में हम भी थे अफसोस में नहीं मिला शादी का कोई न्योता मिली नहीं कोई दावत हमनें भी सोच लिया नहीं […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

दत्त जयंती

दत्त जयंती ********* मार्गशीर्ष मास की पूर्णिमा को दत्तात्रेय जयंती मनाई जाती है.शास्त्रों के अनुसार भगवान दत्तात्रेय का जन्म इसी तिथि को माना गया है. भगवान दत्तात्रेय गुरु वंश के प्रथम गुरु  और योगी थे इस लिए उन्हें योगिराज कहा जाता है. शैव मत मानने वाले इन्हें शिवजी का अवतार और वैष्णव मत वाले इन्हें […]

कविता

सर्द फिजा

सर्द हवा नीला आसमां खुली छत सूरज सर ऊपर कपकपाती देह तपिश सूरज की क्षी्ण सर्दी और गरमी के बीच छिड़ी हुई है जंग कभी दिखे खुद की छाया हो जाए कभी लुप्त अंधेरा छटेगा उजाला होगा आखिर में जीतेगा उजाला ही हार होगी अंधेरे की

सामाजिक

जिंदगी खूबसूरत इनायत है

जिंदगी ईश्वर की दी हुई सबसे खूबसूरत इनायत है. हर हाल में इसे खूबसूरती से जीना चाहिए. जिंदगी है तो दुःख सुख तो लगे रहने वाले ही है ,फिर उनसे क्या घबराना.हर समय सुख ही सुख रहे यह संभव नहीं. समय चक्र है यह. जो नीचे है वह ऊपर आएगा ही .जो ऊपर  है उसे […]

हास्य व्यंग्य

मुंगेरी लाल के हसीन सपने

सुबह उठकर चाय पीकर ध्यान का अभ्यास करने के बाद मैं अपनी छत पर शरीर को स्वस्थ रखने के लिए कुछ एक्सरसाइज, दौड़, लाफिंग एक्सरसाइज, ताली बजाने आदि में एक घंटा व्यस्त रहता हूं. आज भी यह सब कार्य मैंने किए .दोपहर का खाना खाने के बाद ठंड की वजह से फिर छत पर चला […]