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टेसू झांझी का प्रेम विवाह

यह तो नहीं मालूम कि टेसू और झेंझीं के विवाह की लोक परंपरा कब से पड़ी पर यह अनोखी, लोकरंजक और अद्भुत परंपरा बृजभूमि को अलग पहचान दिलाती है,जो बृजभूमि से सारे उत्तरप्रदेश और मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड तक गांव गांव तक पहुंच गई थी जो अब आधुनिकता के चक्कर में और बड़े होने के भ्रम […]

कविता

महंगाई

जब से आई यह खबर आयकर विभाग रखता है पैनी नजर सभी हाई वैल्यू ट्रांस्क्शन पर यानी बड़े बड़े लेनदेन पर फिलहाल मैंने बन्द कर दिया है आलू, टमाटर प्याज खरीदना अब मैं शाम को जाता हूं मंडी बन्द होने के वक़्त खरीद लाता हूं छटी बची सब्जियां

लेख

गुबरैला

हम अधिकतर लोग गांव से शहरों में आकर बसे हैं और कुछ एक का अभी भी गांवो से सम्बन्ध होगा .गांवों में हम सभी ने एक ऐसा कीड़ा भी देखा होगा जो उस स्थान पर मिलता है जिस जगह पर गाएं भैंसों का गोबर पड़ा होता है. मैं समझता हूं ध्यान में आया होगा आप […]

कविता

प्रेम

प्रेम क्या है क्या है परिभाषा इसकी कोई सुधीजन मुझको तो बतलाए मैं तो परिभाषित कर न सका प्रेम के इन दो शब्दों को कोई शब्द मिला नहीं मुझको जो कर देता इसकी व्याख्या मैंने तो इतना ही समझा यह है श्रृंगार रूह का आंखों को पढ़कर स्पर्श कर किसी का अहसास हुआ इसका निशब्द […]

कविता

करोना

आजकल दिन कुछ अच्छे नहीं चल रहें हैं निराशा,उदासी,बेगानापन,चित्त भटकाव सभी का चौतरफा आक्रमण हो रहा है. सोचा चलो किसी हस्त विषेशज्ञ की सलाह लूं. यह सोच कर मैं घर से निकला , निकलते ही एक सज्जन मिल गए . हाल चाल पूछने के बाद उन्होंने भी अपनी मनोस्थिति को शेयर करते हुए कुछ कुछ […]

कविता

शुक्रिया जिंदगी

जिंदगी शुक्रिया तेरा कितने सबब दिए तूने हर सबब लाजवाब तेरा तेरे सबबों से सीख कर पूरी कर रहा जीवन की यह अद्भुत यात्रा हर पड़ाव एक सबब है उसके ही सहारे बढ़ जाता हूं आगे जीवन के अगले पड़ाव को यात्रा अभी जारी है जीवन के ऊबड़ खाबड़ रास्तों पर खतम नहीं हुई है […]

कविता

पतझड़

पतझड़ निशानी है कि पत्ते परिपक्व हो गए हैं उनके अब गिरने की तैयारी है और एक एक कर वो पेड़ की शाखाओं से गिरने लगे है. तो क्या पेड़ रोता है क्या आंसू टपकाता है नहीं ना उसे मालूम है इन्हें गिरना ही है तो शौक कैसा बुढापा भी तो ऐसा ही है उसके […]

कविता

सोच

आदमी सोचता है बहुत खास है वो लोगों के लिए कैसा यह भ्रम है हकीकत तो यह है कोई फर्क नहीं पड़ता किसी को किसी के होने न होने से नाम भी भूल जाते हैं लोग जो चार दिन आप न आए नजर इसीलिए चाहते हुए भी नहीं छोड़ पाता यह आभासी दुनियां मुझे अपने […]

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जीवन क्या है

जीवन क्या है यह हो जाए वोह हो जाए यह मिल जाएं वो मिल जाएं यह सब अभिलाषा ही तो जीवन है उठ खड़ी नित्य एक अभिलाषा जीवन को गति देती है थक हार रात सो जाएं फिर सुबह उठ अभिलाषा पूर्ण करने में लग जाएं कब सुबह हुई कब रात हुई इस अभिलाषा में […]

कविता

दुनियां पागल है यां फिर मैं दीवाना

दुनियां है इक पागल खाना मैं भी पागल तुम भी पागल सब के सब यहां हैं पागल कोई पैसे को पागल कोई शौहरत को पागल कोई प्रेम में पागल कोई है निराशा में पागल कोई भगवान पाने को पागल कोई उसकी भक्ति में पागल जिधर देखो उधर पागल ही पागल कोई ईर्ष्या में पागल कोई […]