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  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    सनम का चेहरा है ये या कि माहताब कोई है रोशनी का समन्दर कि आफताब कोई ये खून है कि पसीना कोई बताये हमें है आँसुओं का ये दरिया कि चश्मे आब कोई वो एक चेहरा...


  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    हमारे साथ रहा फिर भी दूर-दूर रहा न हमने उससे कभी कुछ न उसने हमसे कहा वो जानता है हमें उससे हम भी हैं वाकिफ बस इक गुरूर का दरिया हमारे बीच बहा न छेड़छाड़ की...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    मेरे भीतर कोई खुशबू का बिखर जाता है मुझको उस वक्त उजाला सा नजर आता है सीप की पलकों पे मोती से छलक आते हैं जब अनाड़ी कोई दरिया में उतर जाता है डूबती आस को...

  • गजल

    गजल

    मैंने तुम दोनों को सोचा तो उभर आई गजल उँगलियाँ काँपीं तो कागज पे उतर आई गजल गुफ्तगू अपनों से करने को गजल कहते हैं इतना कहने के लिए छोड़ के घर आई गजल साधना ध्यान...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    दूर होकर भी पास होता हैवो जो हंसकर उदास होता है बाज मौकों पे आम होकर भी गैर अपनों से खास होता है मुस्कराता है चोट खाकर भी आदमी गमशनास होता है अपना अख़लाक़ बेचने वाला कामनाओं का दास होता है तन की...

  • गजल

    गजल

    तुमने अपने ही पैरों पर स्वयं कुल्हाड़ी मारी है इतना और करो पीड़ा का ब्याह रचा दो क्वाँरी है कभी लकीरें मिट जाती हैं कभी बड़ी हो जाती हैं किस्मत बनती और बिगड़ती रेखाओं से हारी...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    चिरागों को लहू से जब भी दीवाने जलाते हैं हवायें थरथरा उठती हैं तूफाँ काँप जाते हैं न सजदे में झुके न बोझ से दोहरे हुए हैं हम अदब की इस अदा को आप क्यों धोखा...