गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

आदमी और कभी अहले खुदा की बातें दोस्ती और कभी अहदे-वफा की बातें कभी खुशबू कभी मौसम कभी ये वादे-सबा जिस तरफ देखिए बस तेरी अदा की बातें जिन्दगी-मौत कभी चाँद-सितारे-सूरज धूप-बरसात कभी काली-घटा की बातें दर्द अहसास घुटन टीस कराहें चीखें बेबसी जुल्म तिरस्कार बला की बातें प्यार इसरार इशारों की जुबाँ खामोशी साज […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

धूप का जिक्र कभी छाँव की बातें करना कभी शहरों की कभी गाँव की बातें करना दस्तकें देती हथेली से लहू के किस्से और छालों से कभी पाँव की बातें करना कभी आँगन में उतरते हुए सूरज को नमन कभी बदली में छिपे चाँद की बातें करना कभी दरिया से चुहल और झड़प झरनों से […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

कौन है छोटा बड़ा इस बात की चर्चा न कर आइना रख सामने परछाइयाँ देखा न कर उम्र के अनुभव से कद को नापना अब छोड़ दे व्यर्थ की बातों में अपने इल्म को जाया न कर जो दलाली खा रहे हैं उनपे कवितायें न लिख कीमती शेरों को सस्ती हाट में बेचा न कर […]

गीतिका/ग़ज़ल

गजल

क्या गुजरती है मेरे साथ बताऊँ कैसे हर किसी को मैं नजर आऊँ तो आऊँ कैसे एक पल के लिए भी चैन कहाँ है मुझको दिल से किसी से मैं लगाऊँ तो लगाऊँ कैसे पेश करने के लिए कुछ भी नहीं अश्कों के सिवा घर किसी को मैं बुलाऊँ तो बुलाऊँ कैसे नींद को भाता […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

अपने हाथों की लकीरों में पढ़ाकर उसको गुनगुनाये वो अगर सिर्फ सुनाकर उसको गीत उर्दू में कहे तू कि गजल हिन्दी में तुझको पढ़ना है तो पढ़ किन्तु दिखाकर उसको नाम के पीछे न पड़ काम भी कुछ करके दिखा क्या करेगा तू अभी घर में बुलाकर उसको माँ तो बस माँ है वो हिन्दी […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

सनम का चेहरा है ये या कि माहताब कोई है रोशनी का समन्दर कि आफताब कोई ये खून है कि पसीना कोई बताये हमें है आँसुओं का ये दरिया कि चश्मे आब कोई वो एक चेहरा हमें यूँ दिखाई देता है खिला हो जैसे बगीचे में गुलाब कोई हमारे घर की गली में किरण के […]

पुस्तक समीक्षा

शान्तिदूत : श्री कृष्ण के मानवीय व्यवहार को जानने समझने का अनोखा दस्तावेज

लेखक-कथाकार डाॅ विजय कुमार सिंघल ‘अंजान’ का इस लघुउपन्यास को लिखकर सामने लाने का मुख्य उद्देश्य श्री कृष्ण के विषय में फैली अनेक भ्रांतियों से पर्दा उठाना है। आम पाठकों को कदाचित ज्ञात हो कि श्रीकृष्ण को भारत की जनता पूर्ण परात्पर ब्रह्म के रूप में भगवान समझती और पूजती है, लेकिन हमारे इस लेखक […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

हमारे साथ रहा फिर भी दूर-दूर रहा न हमने उससे कभी कुछ न उसने हमसे कहा वो जानता है हमें उससे हम भी हैं वाकिफ बस इक गुरूर का दरिया हमारे बीच बहा न छेड़छाड़ की बातें न गुफ्तगू कोई जुदा था दर्द सो हमने जुदा ही सहा तमाम रंग थे बिखरे हमारे चारों तरफ […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

मेरे भीतर कोई खुशबू का बिखर जाता है मुझको उस वक्त उजाला सा नजर आता है सीप की पलकों पे मोती से छलक आते हैं जब अनाड़ी कोई दरिया में उतर जाता है डूबती आस को उम्मीद सी बँध जाती है एक चेहरा जो तसव्वुर में उभर आता है वक्त न चाहे तो हक पा […]

गीतिका/ग़ज़ल

गजल

मैंने तुम दोनों को सोचा तो उभर आई गजल उँगलियाँ काँपीं तो कागज पे उतर आई गजल गुफ्तगू अपनों से करने को गजल कहते हैं इतना कहने के लिए छोड़ के घर आई गजल साधना ध्यान भजन योग इबादत पूजा इतने घाटों में नहायी तो निखर आई गजल मुझको विश्वास है तुम सीख के आओगे […]