गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

आँखों में आफताब उगाने की बात है कोहरे का खौफ दिल से मिटाने की बात है अमावस का रंज करने से कुछ फायदा नहीं दीपावली का पर्व मनाने की बात है ऐसी है चकाचैंध फिसलना है लाजमी गिरते हुओं को सिर्फ उठाने की बात है मुँह ढकके पड़े रहने से तम जाएगा नहीं बस उठके […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

सात रंगों की तरह मिलके बिखर जाते हो और खुशबू की तहर छू के गुजर जाते हो मैंने जब भी तुम्हें पलकों पे सजाना चाहा तुम दबे पाँव तभी दिल में उतर जाते हो दीप गंगा में सरे-साँझ सिराने वाले बन्द आँखों में लिये किसको किधर जाते हो रूप दुनिया का जो बिगड़ा तो बिगड़ता […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

तुम पास मुझे अपने बुला क्यों नहीं लेते हे राम मुझे अपना बना क्यों नहीं लेते अच्छाई से ज्यादा यहाँ निन्दा का चलन है इस ऐब से तुम मुझको बचा क्यों नहीं लेते तुमने  तो विभीषण को भी सीने से लगाया था आया हूँ शरण में तो उठा क्यों नहीं लेते दीनों पे अकारण ही […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

हम किसी से गिला नहीं रखते बेवजह आईना नहीं रखते बात करते हैं बात सुनते हैं प्यार में फासला नहीं रखते मन के मंदिर में तेरी मूरत है पत्थरों में खुदा नहीं रखते इस तरफ हौसले उधर मंजिल दरम्याँ रास्ता नहीं रखते हमने सच की उपासना की है झूठ से वास्ता नहीं रखते हमको छेड़ा […]

गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका

आजाद हिन्द फौज की धड़कन तुम्हीं तो थे हिन्दोस्ताँ के भाल का चन्दन तुम्हीं तो थे जलती मशाल या कि किसी क्रान्ति की मिसाल या फिर किसी शहीद का वन्दन तुम्हीं तो थे टपका किये लहू की तरह आँख-आँख से माँ भारती की श्वाँस का क्रन्दन तुम्हीं तो थे होते ही साँझ यूँ छिपा निकला […]

गीतिका/ग़ज़ल

शिक्षक

शिक्षक ध्यान में आये तो, मेरा मन महकता है ! मेरी सांसे महकती हैं मेरा, जीवन महकता है !! महकती रूह कहती है कि उसका तन महकता है जिसे शिक्षक छुए माटी का वो बरतन महकता है !! महकती बस्तियां देखीं महकते लोग देखे हैं कभी साया महकता है कभी दरपन महकता है !! संभल […]

गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका

हमारी अर्चना स्वीकार कर लो हृदय की कल्पना साकार कर दो हम अपनी शाख से बिछड़े हुए हैं हमें अपने गले का हार कर लो असीमित प्यार की देवी हो तुम तो उपेक्षित हम हैं हमसे प्यार कर लो हमारी भावना वश में नहीं है तुम्हें भाये तो अंगीकार कर लो तुम्हीं से ‘शान्त’ हम […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

आदमी और कभी अहले खुदा की बातें दोस्ती और कभी अहदे-वफा की बातें कभी खुशबू कभी मौसम कभी ये वादे-सबा जिस तरफ देखिए बस तेरी अदा की बातें जिन्दगी-मौत कभी चाँद-सितारे-सूरज धूप-बरसात कभी काली-घटा की बातें दर्द अहसास घुटन टीस कराहें चीखें बेबसी जुल्म तिरस्कार बला की बातें प्यार इसरार इशारों की जुबाँ खामोशी साज […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

धूप का जिक्र कभी छाँव की बातें करना कभी शहरों की कभी गाँव की बातें करना दस्तकें देती हथेली से लहू के किस्से और छालों से कभी पाँव की बातें करना कभी आँगन में उतरते हुए सूरज को नमन कभी बदली में छिपे चाँद की बातें करना कभी दरिया से चुहल और झड़प झरनों से […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

कौन है छोटा बड़ा इस बात की चर्चा न कर आइना रख सामने परछाइयाँ देखा न कर उम्र के अनुभव से कद को नापना अब छोड़ दे व्यर्थ की बातों में अपने इल्म को जाया न कर जो दलाली खा रहे हैं उनपे कवितायें न लिख कीमती शेरों को सस्ती हाट में बेचा न कर […]