कविता

नवयुग का निर्माण करें

जीवन को नियमित बना कर,नवयुग का निर्माण करें ह्रदय  से सब की सेवा कर,राष्ट्र चेतना  का ही व्रत लें जियें स्वयं भी प्रसन्ता से,और सभी को  जीने दें करें बुरा ना  कभी किसी का,बुरा करे उसे दंड दें जाति पाति और शहर गाँव का,भेद सदा को मिट जाये रिश्वतखोरी,चोरबाजारी का, सब मिलकर अंत करें — […]

कविता

तुलसी  की   रामायण

तुलसी  तेरी  रामायण  से कितने  जीवन  सुधर गए है। घर  घर में  है  इसकी  पूजा  चाहे  वर्षों  गुजर  गए है।। भारत  क्या  भारत से बाहर  भी  इसकी  पूजा होती है । मानस  के  पढ़ने से  ही होती  अंतर तम  में ज्योति है।। हर   दोहा   चौपाई   मन   को  ऐसी  शिक्षा  दे जाती […]

कविता

हम जग जाएँ

जागने  का वक्त  है   हम जग जाएँ, यूँ ही  अपनी  जिन्दगी  को  न  गंवाएं आये हैं जिस काम को पहचान लें हम, आत्मखोज करके हम धन्य हो जाएँ आत्मा हम हैं  मिलें  परमात्मा से, एकाग्रता से ध्यान में समय को लगाएं हो  गए परपंच  हम  से  जो अभी  तक, अंधविश्वासों से अब हम दूर […]

कविता

अँधेरे में हैं ढूंढते रौशनी

जागने को तो जागे हुए हैं  सभी पर अँधेरे में हैं ढूंढते रौशनी दर बदर खाते रहते हैं जो ठोकरें वो वक्त देख करके संभाते नहीं प्यार करता है कोई तो नफरत मिले चाहा था जिसे वह मिला ही नहीं देखने को तो सब खुश दिखाई दिए पर हैं चिंतित सभी मुंह पे रौनक नहीं […]