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  • गजल

    गजल

    उम्र दर उम्र यूं रह – नुमाई करो | उम्र दर उम्र से आशनाई करो | उम्र दर उम्र का तकाजा रहा | उम्र दर उम्र तुम बे – वफाई करो | उम्र दर उम्र गर...

  • मुतल्ला गजल

    मुतल्ला गजल

    जान लेंगी मेरी आज ये हिचकियां याद आती रही वस्ल की मस्तियां रास आने लगी जब से तन्हाइयां फुसफुसाती रही रात भर आंधियां कोई जाने हमारी न मजबूरियां दूर रहकर बनाई हैं नजदीकियां उम्र दर उम्र...





  • जख्म गैरों के जाकर

    जख्म गैरों के जाकर

    गजल : कुमार अरविन्द गैर के जख्मो को हर रोज सुखाते रहिये | अपने किरदार का किरदार निभाते रहिये | राब्ता ही न रहा मुझसे तो शिकवा कैसा | करके बर्बाद मुझे ज़श्न मनाते रहिये |...

  • गजल

    गजल

    वक्त का वक्त क्या है पता कीजिए बाखुदा हूं  खुदा बाखुदा कीजिए दर्दे – दिल आज मेरे मुकाबिल रहे सुखनवर से उन्हें आशना कीजिए चांद तक की अदा कुछ सँवर जायेगी अश्क आंखों से गर आबशा...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    रोग जाता ही नहीं कितनी दवा ली हमने माँ के क़दमों में झुके और दुआ ली हमने इस ज़माने ने सताया भी बहुत है मुझको आग ये सीने की अश्कों से बुझा ली हमने जब नजर...

  • गजल

    गजल

    हैं चाह मिलूं उससे जो अक्सर नहीं मिलता दीवार घरों में है मगर घर नहीं मिलता ये आप भी देखें है कि बस मुझको भरम है हर शख़्स परेशान है खुलकर नहीं मिलता इस ज़िन्दगी के...