Author :

  • आखिरी कहानी (भाग 4/5)

    आखिरी कहानी (भाग 4/5)

    अध्याय 4 – औघड़ बाबा निरंजन का संकलन लगभग-लगभग पूरा हो गया था। उसे अपनी आखिरी कहानी की जितनी ही शिद्दत से तलाश थी, उतनी ही वह उससे दूर जा रही थी। काफी खोजने के बाद...

  • आखिरी कहानी (भाग 3/5)

    आखिरी कहानी (भाग 3/5)

    अध्याय 3 : विपुल बाहर टहलते-टहलते उसे मालती की याद आई मगर वह उस गली में किसी कीमत पर नहीं जाना चाहता था। वह किसी अनजान तरफ मुड़ गया। उसने जेब में हाथ डाला तो पायल...

  • आखिरी कहानी (भाग 2/5)

    आखिरी कहानी (भाग 2/5)

    अध्याय 2– रजनी जी मालती का नाम जैसे दहकते लोहे की मुहर से सीने पर दाग देने जैसा था। उसका ख्याल भी आता था तो निरंजन झुलस जाता था। कुछ इस कदर कि आस-पास का कुछ...

  • विदाई

    विदाई

    आंगन में चारो ओर लाइटें लगा दी गई हैं। अब मंडप खड़ा करने की तैयारी चल रही थी जब चिंटू भागता हुआ आँगन में आकर खड़ा हो गया और दोनों हाथ कमर पर रखकर चिल्लाने लगा...

  • आखिरी कहानी (भाग 1/5)

    आखिरी कहानी (भाग 1/5)

    अध्याय 1 – मालती सिगरेट के धुएँ में उसके चेहरे का केवल दाढ़ी-मूँछ वाला हिस्सा दिख रहा था, बाक़ी धुएँ में ही विलीन हो चुका था। उस गुमटी के पास गड़े लैम्प पोस्ट के नीचे खड़े...

  • दो मुँहवाला साँप

    दो मुँहवाला साँप

    धीरे-धीरे शाम पसर रही थी और ठंड ने फैलना शुरु कर दिया था। सूरज ने अपना सुनहरा आँचल वापस खींच लिया था मगर रात ने अभी भी अपनी काली चादर नहीं ओढ़ाई थी। सिंक में अपने...

  • खानाबदोश ज़िन्दगी

    खानाबदोश ज़िन्दगी

    पुरानी कॉलोनी के पार्क में वे दोस्तों के साथ खेल रहे थे कि मुझे देख सब छोड़-छाड़, अंजना और अंशु, दौड़कर मुझसे लिपट गए। दोनों को पता है, कुछ न कुछ तो मेरे पर्स में या...

  • टाई और धोती

    टाई और धोती

    वो बालों में तीसरी बार कंघी फेर रही थी, मगर फिर भी संतुष्ट नहीं थी। एक ओर के बाल उसे उठे-उठे लग रहे थे। उसने बालों में लगा छोटा सा क्लिप फिर खोल दिया। सिर के...

  • मेरे चौथी ग़ज़ल

    मेरे चौथी ग़ज़ल

    फर्श से अर्श तक पहुँची हूँ, वापस फर्श तक पहुँचना बाक़ी है। हक़ीकत देखना है अभी कि अभी तो झूमा रहा मुझे मेरा साकी है॥ जाने से किसी के ख़त्म होता है कहाँ जीने का सिलसिला...

  • बिछोह

    बिछोह

    दूर-दूर तक हरयाली फैली थी। मंद-मंद हवा चल रही थी। इस हल्की हवा में पीपल के पत्ते एकदम मचल-मचल के हरहरा रहे थे जबकि सामने खड़ा आम कितना शांत गंभीर था, बस एक बार अपनी किसी...