पर्यावरण

आधुनिक विकास बनाम बाघ और अन्य वन्यजीव

बाघ का नाम सुनते ही एक आम भारतीय का सिर गर्व से ऊठ जाता है। भारतीय वन्य प्राणिजगत का यह सबसे बड़ा, ताकतवर, विलक्षण और अत्यन्त सुन्दर प्राणी होता है। पहले भारत का राष्ट्रीय पशु सिंह था, परन्तु बाद में उसकी जगह अपनी विशिष्ट गुणों शक्ति और अपने आन-बान-शान के प्रतीक बाघ के विलक्षण गुणों […]

पर्यावरण

एवरेस्ट पर पर्वतारोहियों की बढ़ती भीड़

पिछले दिनोंमाऊँट एवरेस्ट के बारे में एक स्तब्ध कर देने वाला समाचार आया कि दुनिया की इस सबसे ऊँची चोटी पर इतनी भीड़ जमा हो गई है कि वहाँ जाम की स्थिति पैदा हो गई है, जिससे लोगों को उस सर्वोच्च शिखर  पर चढ़ने के लिए कई-कई घंटों इन्तजार करने से उनके पास उपलब्ध ऑक्सीजन […]

पर्यावरण

आखिर अन्न और जल की बर्बादी हम कब रोकेंगे ?

मानव जीवन { लगभग सभी जीव जगत } के लिए भी ,के सांसों के स्पंदन और जीने के लिए सबसे जरूरी और मूलभूत तीन आवश्यक चीजें क्रमशः हवा ,पानी और भोजन है । आधुनिक सभ्यता और विकास के साथ-साथ क्रमशः प्रथम दो  चीजें मानवकृत कृत्यों से प्रदूषित और विनष्ट होती जा रहीं हैं ,औद्योगिक क्रांति […]

राजनीति

धर्म ,जाति और अब वंशवाद

इस देश को अब तक सबसे ज्यादे नुकसान पहले ‘धर्मांधता ‘ने पहुँचाया फिर ‘जातिवाद’ ने और अब आज की ‘सिद्धांत विहीन’ राजनीति में ‘सर्वाधिक ‘नुकसान यहाँ नेता का बेटा ही उसका उत्तराधिकारी बनेगा की ‘वंशवादी’ तुच्छ राजनीति ने देश का बेड़ा गर्क कर दिया है। इस देश में केवल वामपंथी दलों को छोड़कर अन्य सभी […]

राजनीति

भारत में कैसा और कौन सा लोकतंत्र ?

यह लोकतंत्र है ‘, अब यह मात्र रस्म अदायगी भर रह गई है, क्योंकि लोकतंत्र रूपी इस पेड़ में सामंतवाद, परिवारवाद, फॉसिज्मवाद, अपराधवाद, मॉफियावाद, वंशवाद, गुँडावाद, संम्प्रदायवाद, जातिवाद, जुमलावाद, झूठवाद आदि घुन या दीमक लग गये हैं, जो लोकतंत्ररूपी विशाल, फलदार वृक्ष की जड़ों को ही कुतर रहे हैं, ये भारत के सभी राजनैतिक दलों […]

पर्यावरण

मेरे घर के बारामदे में गौरैया के नन्हें-मुन्ने ,प्यारे बच्चे

मैं अपने घर के उन सभी खुले व ऊँचे स्थानों पर अपनी प्रिय गौरैयों के लगभग 550 घोसलों को बनाकर लगाया हूँ, जहाँ उनके दुश्मन जैसे बिल्ली, साँप आदि न पहुँच सकें और वे घोसले बारिश और आँधी-तूफ़ान में भी सुरक्षित रहें जैसे छज्जे के नीचे, जीने (सीढ़ियों) के ऊँचे स्थानों, बारामदे के पिलरों के […]

स्वास्थ्य

ऊँटनी के दूध में कई जटिल रोगों को ठीक करने की अद्भुत क्षमता

ऊंटनी के दूध के ‘औषधीय ‘गुण के बारे में अध्ययन के लिए इंडियन कांउसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च { आइसीएमआर } ने अपने निर्देशन में एस.पी. मेडिकल कॉलेज ,बीकानेर और जोधपुर के डेजर्ट मेडिकल कॉलेज के शोधार्थियों के संयुक्तरूप से राजस्थान के आठ जिलों के 24000 लोगों के खान-पान और रहन-सहन पर 2015 से 2018 तक […]

पर्यावरण

तालाब या पोखर और मानव बनाम कथित आधुनिकता

तालाब या पोखर या पोखरा हम भारतीयों के बचपन के दिनों के स्मृति पटल पर अभी भी ऐसे अंकित हैं, जैसे वे हमारे जीवन के अभिन्न अंग हों। हम लोग बचपन में रात में पहली जोरदार मूसलाधार बारिश होने पर सुबह होने का बेसब्री से इंतजार करते थे, क्योंकि गाँवों में मई -जून की झुलसा […]

सामाजिक

शरणार्थी समस्या : मनुष्यताऔर आधुनिक सभ्यता पर एक कलंक

अभी पिछले दिनों लगभग सभी समाचार पत्रों में प्रमुखता से यह खबर छपी , जिसमें अलसल्वाडोर का एक युवा बेरोजगार पिता अपने मात्र 23 माह की बेटी के साथ अपनी बेबसी ,गरीबी ,बेरोजगारी और आर्थिक तंगी से छुटकारा पाने के लिए अपनी उस अबोध बच्ची को अपनी पीठ पर बाँधकर अवैध रूप से एक नदी […]

पर्यावरण

हिमालयी ग्लेशियरों के पिघलने में ऑलवेदर चारधाम सड़क का अहम् रोल

मानवोचित कृत्यों से इस धरती पर हर तरह का प्रदूषण बढ़ता जा रहा है, ऋतु परिवर्तन हो रहा है, यूरोप जैसे ठंडे देशों में भयंकर लू और गर्म देशों में कड़ाके की ठंड की अवधि बढ़ती जा रही है। कहीं अतिवृष्टि और कहीं भयंकर सूखा आदि करके प्रकृति अपनी बारबार रोष प्रकट कर रही है। […]