पद्य साहित्य हाइकु/सेदोका

चंद हाइकु

चंद हाइकु 1. खत्म करेगी कोरोना महामारी आपसी दूरी। *** 2. घर में रहें बाहर न निकलें कोरोना ठेलें। *** 3. कहीं भी जाएँ सेनिटाइजर व मास्क लगाएँ। *** 4. आवश्यक हो तो ही बाहर जाओ जान बचाओ। *** 5. कोरोना भी तो चाइना उत्पाद है टिकेगा नहीं। *** 6. मेरा विश्वास हारेगा ये कोरोना […]

कथा साहित्य संस्मरण

माँ

संस्मरण “””””””””” माँ “” वैश्विक महामारी कोरोना के संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए भले ही भारत में 25 मार्च, 2020 से लॉकडाऊन की शुरुआत हुई हो, परंतु हमारे शहर रायपुर (छत्तीसगढ़ की राजधानी) में 18 मार्च, 2020 की दोपहर को पहला कोरोना पॉजिटिव केस मिलने के तत्काल बाद पूरे शहर में धारा 144 लागू […]

कथा साहित्य लघुकथा

उतरन

उतरन “घर की स्थिति से तुम भलीभांति वाकिफ हो फिर भी रीता को गीता के पुराने कपड़े पहनाने से क्यों मना करती हो ? रीता और गीता दोनों कोई गैर तो नहीं, सगी बहने हैं।” रमेश ने अपनी पत्नी से कहा। “भले ही दो जोड़ी कपड़े पहनें, पर अपने पहने, किसी की उतरन नहीं, चाहे […]

कथा साहित्य लघुकथा

मजदूर

मजदूर कहाँ तो उन्हें पहले भरपेट खाने को नहीं मिलता था और अगर मिलता भी, तो तब, जब वे भूख से व्याकुल हो चुके होते। माँ और बापू रात के आठ-साढ़े आठ बजे तक काम से लौटते। बापू तो अपनी कमाई की पूरी पी जाते, पर माँ अपनी कमाई से आटा, सब्जी वगैरह खाने का […]

कथा साहित्य लघुकथा

रामकली की दिवाली

रामकली की दिवाली ‘‘माँ आज दीवाली है न, हम भी अपने घर में दीपक जलाएंगे। ये देखो मैंने दिया भी बना लिया है. अब तुम थोड़ा-सा तेल दे दो।’’ चहकते हुए पाँच वर्षीय रामू बोला। “हाँ बेटा ये लो तेल की बोतल।” कहते हुए विधवा रामकली तेल की बोतल रामू को थमा दी, जिसमें बड़ी […]

कथा साहित्य लघुकथा

मातृत्व

मातृत्व “देखो मालती, मैं तुम्हारी गरीबों की मदद करने की प्रवृति का विरोधी नहीं हूँ। उन्हें खाने-पीने, पहनने-ओढ़ने की चीजें देने, आर्थिक रूप से मदद करने तक तो ठीक है, पर ये कामवाली बाई के बच्चे को अपना दूध पिलाना… छी… छी… तुम ऐसा कैसे कर सकती है?” “क्यों… इसमें बुरा क्या है? कामवाली बाई […]

कथा साहित्य लघुकथा

माँ का हृदय

माँ का हृदय फोन कटते ही निर्मला सोफे में धम्म से बैठ गई। उसके कानों में अब भी होने वाली बहू नेहा के एक-एक शब्द गूंज रहे थे। “एक मां अपने बच्चे के लिए अपशकुनी कैसे हो सकती है आंटी जी ? पांच साल की थी मैं, जब मेरे पिताजी की एक सड़क दुर्घटना में […]

कथा साहित्य लघुकथा

शुक्रिया कोरोना

शुक्रिया कोरोना “कितना अच्छा लग रहा है आज घर में सबको एक साथ आराम से बैठकर देखते हुए।” लक्ष्मी ने कहा। “हाँ लक्ष्मी, तू सही कह रही है। आज पहली बार हम चारों दिन के समय घर में एक साथ हैं, वरना तो तीज-त्योहारों में भी काम पर जाना पड़ता है।” नारायण पत्नी की हाँ […]

कथा साहित्य लघुकथा

कोरोना संक्रमण

कोरोना संक्रमण तीन हफ्ते की लॉकडाऊन के बाद जब लॉकडाऊन – 2 की घोषणा हुई, तो स्थिति असह्य लगने लगी। उन्होंने अपने 3-4 घनिष्ठ मित्रों से मोबाइल फोन पर ही चर्चा कर कार्यक्रम की अंतिम रूपरेखा तैयार कर ली। वे जैसे ही अपने कक्ष से बाहर निकले, श्रीमती जी ने बाहर न जाने के लिए […]

लघुकथा

लघुकथा – जनता जनार्दन

”मंगलू, ऐ मंगलू घर में नहीं हो क्या ?” “क्या बात है सरपंच जी, आप क्यों चिल्लाए जा रहे हैं।” ”अरे मंगलू, देख, कौन आए हैं तुम्हारे घर। हमारे प्यारे विधायक, मंत्री जी।” “तो… वे कोई भगवान थोड़े ही न हैं। अपने काम से ही आए होंगे। बिठाइए उन्हें हमारे बरामदे में। चाय-पानी भिजवाता हूँ […]